बाजार-दफ्तर बंद रहे, सड़क पर रही आवाजाही
फतेहपुर। लॉकडाउन के आखिरी दिन रविवार को नियमों को शिथिल होते हुए देखा गया। जहां-जहां पुलिस की मौजूदगी थी, वहां ही लोगों ने नियमों का पालन किया। शेष जगहों पर लोग अकारण भी घूमते नजर आए। बाजार और दफ्तर जरूर बंद रहे लेकिन सड़कों पर आवाजाही सामान्य सी दिखी। लोग झुंड के साथ परिचर्चा का हिस्सा बने देखे गए। दोपहर से पहले पुलिस की सख्ती बढ़ने पर सड़कों और गलियों में चहलकदमी कुछ थमी।
जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा हो चुकी है। लॉकडाउन के आखिरी दिन रविवार दोपहर 12 बजे ज्वालागंज चौराहे पर सन्नाटा छाया रहा लेकिन यहीं से महज 200 मीटर की दूरी पर बांदा-सागर मार्ग पर अच्छी खासी चहलपहल देखने को मिली। हालांकि चौक बाजार में भी सन्नाटा ही दिखाई दिया।
एनाउंसमेंट से मेडिकल स्टोर वाले दुविधा में
लॉकडाउन के दौरान प्रशासन ने दवा की दुकानों को जरूरत के लिहाज से चौबीस घंटे खोलने की बात कही थी लेकिन निकाय वाले सुबह दस बजे से दोपहर तीन बजे तक ही दवा की दुकान खोलने का एनाउंसमेंट करने लगे। इससे लोगो में दुविधा की स्थिति हो गई। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के वीरेंद्र गुप्ता का कहना रहा कि निकाय कर्मियों के एनाउंसमेंट से दवा कारोबारी दुविधा में रहे। सब कुछ साफ होना चाहिए था।
शटर गिराकर दुकानदारी
भले ही जिले में चार दिन के लिए प्रशासन ने लॉकडाउन लगाया लेकिन इसका बहुत असर देखने को नहीं मिला। शहर के वर्मा तिराहा से कोतवाली रोड तक दो दुकानों के शटर आधे खुले देखे गए। नासिरपीर रोड हो या फिर चतुरी का पुरवा। इन जगहों पर कई दुकानें खुलीं थीं। कमोबेश ऐसा ही रेल बाजार में दिखाई दिया। हरिहरगंज में एक कपड़ा की दुकान खुली रही। कलक्टरगंज में एक गैर आवश्यक वस्तुओं में शुमार दुकान का एक तिहाई शटर खोल रखा गया था।
सामाजिक दूरी रही हवाहवाई
प्रशासन ने अनावश्यक रूप से घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा रखी थी ताकि सामाजिक दूरी बरकरार रहे। जहां तक जनता की बात रही तो वह इस लॉकडाउन को शुरू से ही हल्के में लेती नजर आई। ज्वालागंज क्षेत्र में एक फल के ठेला को लोग चारों तरफ से घेरे नजर आए। हरिहरगंज ओवरब्रिज के नीचे एक सब्जी की दुकान पर भी भीड़ दिखी। हालात यह रहे कि लगातार मास्क पहनने की सख्ती भरी दी जा रही नसीहत के बावजूद लोग बाज नहीं आ रहे हैं। रविवार को तमाम सड़केें और गलियां, इस बात की बानगी बनी रहीं।