अनियमितताओं से घिरे नर्सिंगहोम्स के विरुद्ध हो रही जिला प्रशासन की कार्रवाई से नाराज नर्सिंगहोम/क्लीनिक संचालकों ने जनस्वास्थ्य संगठन के बैनर तले नहर कालोनी में बैठक कर आवाज बुलंद की गई है। इन लोगों ने प्रशासनिक कार्रवाई को सौतेला करार दिया। आरोप लगाया गया कि प्राइवेट में मौत होने पर संचालकों पर पूरी जवाबदेही मढ़ दी जाती है। जबकि सरकारी अस्पतालों में मरने वाली प्रसूताओं को एनीमिक बता करके जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया जाता है।
नहर कालोनी में बुधवार को प्रशासन स्तर से कराई जा रही नर्सिंगहोम/क्लीनिक की पड़ताल के मामले में नर्सिंगहोम/क्लीनिक संचालकों ने विरोध दर्ज कराया। हाल में ही स्वास्थ्य विभाग स्तर पर हुईं कार्रवाई को उत्पीडन नाम देते हुए नर्सिंगहोम/क्लीनिक संचालकों ने इस पर विराम लगाए जाने की मांग की। कहा कि स्वास्थ्य विभाग के जवाबदेह निरीक्षण के नाम पर मनमानी कर रहे हैं। उन्हें पहले इस तरह की धांधली क्यों नहीं दिखाई दी। संचालकों ने साफ कहा कि प्रशासन भी एक नजरिया नहीं अख्तियार कर रहा है। उसे नर्सिंगहोम में होने वाली मौत नजर आती है जबकि सरकारी अस्पताल में होने वाली मौत को ठीकरा सीधे प्रसूता को एनीमिक होने की बात कह करके उसके परिवार पर फोड़ दिया जाता है।
नर्सिंगहोम/क्लीनिक संचालकों ने बैठक के जरिए विरोध दर्ज कराते हुए आगे की रणनीति बनाई। इस मौके पर महेश मिश्र, राम दुलारे, केपी सिंह लोधी, नितिन कुमार, अतुल शुक्ला, जीतू शुक्ला, अभिषेक कुमार, शंकरलाल राजपूत, राधारानी साहू, गोपाल श्रीवास्तव, प्रतिभा सिंह चौहान, श्रीराम लोधी सहित अन्य संचालक मौजूद रहे।