फतेहपुर। पशुपालन करने वाले किसानों को अब बाजार में दूध बेचने से पहले लाइसेंस बनवाना होगा। बिना लाइसेंस के पशुपालक ने एक लीटर दूध भी बेचा, तो उस पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना व छह माह की सजा हो सकती है।
सरकार ने दूध में मिलावट रोकने के लिए यह निर्णय लिया है। शासन से गाइडलाइन जारी होने के बाद जिला प्रशासन पशुपालकों के लाइसेंस बनाने में जुट गया है।
अभी तक सिर्फ दूधियों को ही लाइसेंस बनवाने की अनिवार्यता थी। गांवों में छोटे व भूमिहीन किसान एक-दो गाय, भैंस रखते हैं। किसान इनका दूध बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं।
अब इन किसानों को भी लाइसेंस लेना पड़ेगा। शासन की मंशा है कि इससे दूध की गुणवत्ता में सुधार होगा और राजस्व भी बढ़ेगा। इसके अलावा डेयरी संचालकों से लेकर दुग्ध संघ की समितियों में दूध बेचने वाले किसानों को इसके दायरे में लाने की तैयारी है।
खाद्य एवं औषधि सुरक्षा प्रशासन विभाग के अधिकारियों को जिले की तीनों तहसीलों में गांव-गांव जाकर दूध बेचने वाले पशुपालकों की तलाश करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
साथ ही यह अधिकारी किसानों को दूध बेचने के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता की जानकारी भी देंगे। एक महीने तक लाइसेंस बनवाने का मौका दिया जाएगा। इसके बाद भी बिना लाइसेंस दूध बेचते मिलने पर विभाग कार्रवाई करेगा। जिले में 55 हजार ऐसे पशुपालक हैं, जो दूध का अच्छा व्यवसाय करते हैं। वह सभी इस नियम के दायरे में आएंगे।
पशुपालकों को लाइसेंस लेने के लिए साइबर कैफे या जनसेवा केंद्र पर एसएसएसएआई की वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना पड़ेगा। इस दौरान एक फोटो, आधार कार्ड होना जरूरी है। इसके लिए अलग-अलग हिसाब से निर्धारित शुल्क भी देना होगा। 100 से लेकर सात हजार रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।
ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में दूध बेचने वाले पशुपालकों के लिए अब लाइसेंस की अनिवार्यता कर दी गई है। इसके लिए पशुपालक को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने के 24 घंटे के अंदर ही लाइसेंस जारी हो जाएगा। - सीएल यादव, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी