खखरेरू। बीस साल पहले किसानों को खाद-बीज और उनकी फसलों का दाम देने वाली साधन सहकारी समिति वर्तमान में वीरान हो चुकी है। समिति की इमारत का प्रयोग ग्रामीण मवेशी बांधने और गोबर से बने कंडे रखने के लिए कर रहे हैं।
बीस साल पहले साधन सहकारी समिति में वित्तीय मामलों की गड़बड़ी के चलते इसे दिवालिया घोषित करके बंद कर दिया गया था। इस घोटाले के जिम्मेदारों लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था।
इसके बाद से यह समिति बंद है। ऐसे में किसानों को खाद-बीज आदि के लिए निजी दुकानों व दूर-दराज की समितियों तक जाना पड़ता है। यहां के लोगों का कहना है कि खाद और बीज न सही लेकिन इमारत का प्रयोग क्रय केंद्र के रूप में किया जा सकता है। इससे स्थानीय किसानों को फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा।
खखरेरू के आनंद दत्त मिश्रा कहते हैं कि समिति बंद होने से किसानों का नुकसान हुआ है। जो खाद और बीज उन्हें यहां से मिलता था। अब उसके लिए भटकना पड़ता है। प्रशासन इस इमारत का प्रयोग गेहूं और धान क्रय केंद्र के रूप में भी करा सकती है। किसानों को कुछ राहत जरूर मिलेगी।
भदौहा के चंद्रभान त्रिपाठी कहते हैं कि देखरेख के अभाव में समिति का भवन खंडहर हो गया है। यहां मवेशी बांधे जा रहे है। कमरों में कंडे भर दिए गए हैं। इस इमारत का प्रयोग किसानों के हित में किया जाए, इससे बेहतर विकल्प नहीं हो सकता है। क्रय केंद बन जाने से किसानों के लाभ होगा।
दरियामऊ के विकास चंद्र दीक्षित बताते हैं कि यहां पहले बीज के अलावा सरकारी रेट पर यूरिया, पोटास, डीएपी आदि मिलती थी लेकिन पिछले दो दशक से सब बंद है। जिला प्रशासन सहकारी समिति को फिर से शुरू कराता है तो यहां के किसानों को जरूर लाभ होगा।
घोटाले की वजह से समिति बंद पड़ी है। इसे शुरू कराने के लिए शासन स्तर पर विभाग पैरवी कर रहा है। सरकारी इमारत का अगर कोई निजी तौर पर प्रयोग कर रहा है तो उसके विरुद्घ कार्रवाई की जाएगी। - रामनयन सिंह, एआर कॉपरेटिव
आनंद दत्त मिश्रा - साधन सहकारी समिति खखरेरू- फोटो : FATEHPUR
चंद्रकांत त्रिपाठी - साधन सहकारी समिति खखरेरू- फोटो : FATEHPUR
विकास चंद्र दीक्षित - साधन सहकारी समिति खखरेरू- फोटो : FATEHPUR