फतेहपुर। कौशाम्बी सड़क हादसे की खबर आते ही चार गांवों के ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के सदस्यों की रूह कांप उठी किसी को कुछ नहीं सूझ रहा था। लोग एक दूसरे से फोन पर संपर्क करने में जुटे थे। किसी ने भी कॉल नहीं उठाई तो सभी और घबरा गए। परिजन के मुंह से यही निकला कि कौन जिंदा है कौन मर गया...कौन बताएगा क्या हुआ। गांव के जनप्रतिनिधियों के सहारे देर रात तक परिजन अपनों से संपर्क में जुटे रहे। हालांकि कुछ ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंचे तो उन्हें अपनों की सलामती का पता लगा।
कुरौली डेरा गांव निवासी राजन निषाद पुत्र शुभम का मुंडन संस्कार में परिजन और रिश्तेदारों को लेकर प्रयागराज संगम गए थे। इनके साथ बकेवर थाना क्षेत्र पहाड़ीपुर की महिला, जाफरगंज थाना क्षेत्र के बारा गांव की महिलाएं, कुरौली का डेरा,चांदपुर थाना क्षेत्र के गज्जा का डेरा में शामिल थीं। इन गांवों के आठ लोगों की जान गई है।
कुरौली डेरा गांव के पूर्व प्रधान रामचंद्र के पास थाना पुलिस ने शाम को हादसे की खबर दी। इसके बाद गांव में खबर फैली। परिवार के लोग मुंडन में गए लोगों को फोन मिलाकर हालचाल लेने की कोशिश करने लगे। किसी का फोन नहीं उठ रहा था।
किसी तरह गांव के देवनारायण का संपर्क लवकुश से हुआ। लवकुश ने खुद को घायल होना बताकर फोन काट दिया। पूरे गांव में अफरा-तफरी फैल गई। कुरौली का डेरा से ही गज्जा का डेरा और बारा गांव में हादसे की खबर पहुंची।
यहां से भी लोग अपने-अपने साधनों से कौशाम्बी रवाना हुए। कुरौली का डेरा से पूर्व प्रधान रामचंद्र कुछ लोगों को लेकर कौशाम्बी गए। मुंडन संस्कार वाले परिवार के क्षत्रपाल निषाद ने बताया कि उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा है। उनकी सुबह यात्रा में गए कमलेश से बातचीत हुई थी।
उन्होंने संगम पहुंचने की जानकारी दी थी। हादसे की खबर आने के बाद किसी से बातचीत नहीं हो पा रही है। मोबाइल पर ही आठ लोगों की मौत का पता लगा है।
बृहस्पतिवार रात 10 बजे लोडर से निकले थे 25 लोग
राजन के पास खुद का लोडर है। वह अपने लोडर से सभी लोगों को लेकर बृहस्पतिवार रात करीब 10 बजे निकला था। हादसे के पीछे माना जा रहा है कि पूरी रात लोडर राजन ने चलाया था। इस वजह से वह नींद में रहा होगा। झपकी आने से ही हादसा होने की ग्रामीणों में चर्चा रही है।
गांव लौटने पर जश्न की थी तैयारी
राजन अपने पुत्र शुभम का धूमधाम से मुंडन संस्कार कर रहा था। उसने सारे नाते-रिश्तेदारों को निमंत्रण दिया था। मुंडन के बाद गांव लौटने पर जश्न की तैयारी थी। गांव में शाम के भोजन की तैयारी के लिए पंडाल और हलवाई लगे थे। अचानक हादसे की खबर आने के बाद सबकुछ थम गया। रिश्तेदारों में खुशी के माहौल की जगह मातम छा गया।