अस्पताल में इलाज को पहुंचे रोगी।
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अलग फीडर की सुविधा होने के बाद भी सदर अस्पताल के रोगी और तीमारदार गर्मी में बिलबिला रहे हैं। घंटों की कटौती से हर रोज हायतौबा की स्थिति देखने को मिल रही है। बिजली न होने से स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है। रात और दोपहर में बत्ती गुल होने से मर्ज और गहरा रहा है। यह स्थिति तब बनी है जब स्वास्थ्य विभाग ने 12 लाख रुपया एडवांस के तौर पर जमा कर रखा है।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल में मौजूदा समय में रोजाना आठ सौ से एक हजार ओपीडी हो रही है। इसके अलावा आईपीडी के 118 बेड भी रोगियों से भरे हैं। इस अस्पताल को बिजली समस्या से दूर रखने के लिए 86 लाख रुपये से निर्बाध विद्युत आपूर्ति दिलाने की व्यवस्था हुई थी।
इसके लिए दो साल पहले राधानगर से स्वतंत्र फीडर के जरिए सदर अस्पताल को आपूर्ति शुरू हुई। लेकिन यह सिलसिला कुछ दिन ही चल सका। इधर, कई महीने से अस्पताल का अलग फीडर काम नहीं कर रहा है।
बाकरगंज फीडर से अस्पताल को बिजली दी जा रही है। इस फीडर पर लोड अधिक होने से आए दिन कोई न कोई समस्या खड़ी होती है और जमकर कटौती की जाती है। शनिवार की रात गुल हुई बिजली रविवार की शाम छह बजे सुचारू हो सकी और आधे घंटे बाद फिर गुल हो गई।
रात बिजली गुल रही और सोमवार की सुबह 10 बजे आई। इसके बाद दोपहर में तीन बजे गुल हो गई, जो शाम पौने छह बजे आई। ऐसी दशा में ओपीडी से लेकर आईपीडी तक में मौजूद रोगी, तीमारदार के साथ डॉक्टर और अस्पताल का स्टाफ हायतौबा करता नजर आया।
सीएमएस डा. ओपी द्विवेदी ने बताया कि हाइडिल खुद समस्या की जड़ बना है। समस्या का हल अभी तक नहीं खोजा जा सका है। ऐसा भी नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग समय से बिल न देता हो, अभी ही 12 लाख रुपया एडवांस जमा किए हैं। इसके बावजूद अस्पताल को बिजली नहीं मिल पा रही है।