खखरेरू। किशनपुर थाना क्षेत्र के गढ़वा और रारी गांव के बीच न बांध बचा है न राह आसान। करीब तीन माह पहले पक्का बांध टूटने के बाद उफनती ससुर खदेरी नदी को पार करने के लिए ग्रामीणों ने कड़ाह को ही सहारा बना लिया है।
दोनों किनारों पर रस्सी बांधकर गन्ने का रस निकालने में इस्तेमाल होने वाले बड़े लोहे के कड़ाह के सहारे लोग नदी के आर-पार जाने को मजबूर हैं। उफनती नदी में यह सफर कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।
गढ़वा गांव निवासी दुर्गा निषाद (70) का रविवार रात अचानक निधन हो गया। सोमवार को परिजन ने गांव से दूर ससुर खदेरी नदी के उस पार स्थित खेत में उनका अंतिम संस्कार किया। शव को ट्रैक्टर से विजयीपुर और सरौली होते हुए खेत तक ले जाया गया। इस दौरान नदी पार करने की ग्रामीणों की मजबूरी भी सामने आई।
गढ़वा और रारी के बीच करीब तीन माह पहले बना पक्का बांध टूट गया था। इसके बाद दोनों गांवों के बीच सीधा आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। ग्रामीणों ने नदी पार करने के लिए दोनों किनारों पर रस्सी बांध रखी है। इसी रस्सी के सहारे कड़ाह को नदी के आर-पार ले जाया जाता है। तेज बहाव वाली नदी में इस तरह आवागमन करना बेहद जोखिम भरा है।
ग्रामीणों के मुताबिक बांध से आवागमन शुरू होने पर दोनों गांवों के बीच कुछ ही मिनट में पहुंचा जा सकता था। अब सड़क मार्ग से करीब 12 से 13 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है। रारी गांव के लोगों को खरीदारी के लिए पौली बाजार जाना होता है। नदी के रास्ते दूरी करीब चार से पांच किलोमीटर ही रह जाती है। लंबा चक्कर बचाने के लिए ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं।
नदी पार करते ग्रामीणों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की। टीम के पहुंचने पर कड़ाह मौके पर नहीं मिला। नदी किनारे मौजूद ग्रामीणों और बच्चों ने बताया कि इसी कड़ाह के सहारे लोग नदी पार करते हैं।
ग्रामीणों ने टूटे बांध की जल्द मरम्मत कराने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते इंतजाम नहीं किए गए तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
उपजिलाधिकारी अश्वनी पांडेय ने बताया कि संबंधित विभाग को सूचना देकर मामले की जांच कराई जाएगी। आवश्यक कार्रवाई करते हुए समस्या का समाधान कराया जाएगा।
फोटो-34-कढ़ाह के सहारे नदी पार करते लोग। संवाद