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दूध, दही से कराया स्नान, मिष्ठान का लगाया भोग

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फतेहपुर में नवरात्र के दूसरे दिन मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की विधि विधान से पूजा की गई।
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दूध, दही, घृत, मधु व शर्करा से माता को स्नान कराकर फूल, अक्षत, रोली, चंदन अर्पण किया। फिर मिष्ठान का भोग लगाकर परिवार की सुख शांति की प्रार्थना की।
महावेदन टोला में श्री शक्तिपीठ मां कालिका मंदिर परिवार की ओर से मां दुर्गा का दरबार सजाया गया है। रविवार को माता के दूसरे स्वरूप की पूजा अर्चना की गई। माता के भक्तों ने मइया के जयकारे लगाए और घंटा, शंख बजाए।
इससे आसपास का माहौल भक्तिमय बना रहा। शहर के शादीपुर, रेलवे स्टेशन के सामने, चौक शीतला मंदिर और हनुमान मंदिर में सजे दुर्गा पंडालों पर सुबह और शाम को आरती हुई। नवभारत कमेटी की ओर से पक्का तालाब में मां दुर्गा का पंडाल सजा।
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आचार्य दुर्गादत्त शास्त्री ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी ने राजा हिमालय के घर में जन्म लिया था। नारदजी की सलाह पर उन्होंने कठौर तपस्या की, ताकि भगवान शिव को पति स्वरूप में प्राप्त कर सकें।
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कठोर तप के कारण मां का नाम ब्रह्मचारिणी व तपश्चारिणी पड़ा। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया, उनका तप देखकर सभी देवता, ऋषि, मुनि प्रभावित हुए। आचार्य ने बताया कि मां ब्रह्मचारिणी के एक हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। मां दुर्गा के दूसरे दिन पीले वस्त्र धारण कर भक्तों ने उपासना की।
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