अध्यात्म, दर्शन, संस्कृति और मानवीय चरित्र के उत्थान के लिए समर्पित आचार्य महाश्रमण के साथ अध्यात्म एवं नैतिकता का लाभ लोगों को मिल रहा है। दिल्ली से चलकर जिले में पहुंची अहिंसा यात्रा से लोगों के जुड़ने का सिलसिला शुरू है। संकल्प पत्र भरकर आचार्य महाश्रमण के दिव्य वचनों को सुनते हुए नशामुक्ति का संकल्प लिया जा रहा है।
तेरापंथ के आचार्य महाश्रमण अपनी धवल सेना के साथ मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कालेज पहुंचे। यहां पर सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संदेश देते हुए यात्रा के दौरान जुड़ने वालों से संकल्प पत्र भरवाया और जाति, संप्रदाय वर्ग तथा राष्ट्र की सीमाओं से ऊपर उठकर लाभान्वित किया।
आचार्य महाश्रमण की इस अहिंसा यात्रा का शुभारंभ भारत की राजधानी दिल्ली से 9 नवंबर 2014 को हुआ। यह यात्रा भारत के विभिन्न प्रांतों और अन्य देशों में इंसानियत की ज्योति प्रज्वलित कर रही है। भारत के विभिन्न प्रांतों से घूमती हुई यह यात्रा नेपाल और भूटान तक जाएगी।
आचार्य महाश्रमण ने बताया कि सद्भाव के अभाव में अहिंसा जीवन व्यवहार में प्रतिष्ठित नहीं हो सकती। पारस्परिक टकराव आपसी दूरियां ही नहीं बढ़ाता, बल्कि कितनों के लिए घातक बन जाता है। अहिंसा यात्रा का दूसरा उद्देश्य है। बेइमानी सामाजिक स्वस्थता का बाधक तत्व है।
जब तक परस्पर धोखाधड़ी का क्रम जारी रहेगा, व्यक्ति सुख और शांति की श्वांस नहीं ले सकता। व्यावसायिक प्रतिष्ठान में देवी-देवताओं के चित्र हों या न हों लेकिन इमानदारी क ी देवी अवश्य प्रतिष्ठित होनी चाहिए। लोगों के हृदय परिवर्तन के द्वारा नशामुक्ति बनाने वाले आचार्य महाश्रमण की अहिंसा यात्रा के दौरान नशामुक्ति का अभियान निरंतर गतिमान है।