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आग लगने में छोटी की मौत बड़ी बहन झुलसी

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अयोध्या का पुरवा गांव में आग लगने से जली बच्चियों के रोते बिलखते परिजन परिजन व ग्रामीणों की लगी भ? - फोटो : FATEHPUR
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अमौली। चांदपुर थाना क्षेत्र के अयोध्या का डेरा गांव स्थित एक घर में सुबह के वक्त आग लग गई। लपटों की चपेट में आकर घर पर सो रही दो मासूम बहनों की मौत हो गई। इसके अलावा पांच बकरियों ने भी दम तोड़ दिया और गृहस्थी का सामान भी जल गया। ग्रामीणों ने किसी तरह आग पर काबू पाया। मौके पर पहुंचे एसडीएम अवधेश निगम व सीओ ने परिवार को मदद का आश्वासन दिया है।
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गांव निवासी राकेश निषाद मजदूरी करता है। सोमवार तड़के वह पत्नी भुलैया के साथ खेत पर मजदूरी करने गया था। घर पर बेटी स्वाती (2) और रागिनी (5) एक चारपाई पर सो रही थीं। दंपती दीपक जलाकर रख गए थे। वही जलता हुआ दीपक चारपाई पर गिर पड़ा और देखते ही देखते मजदूर का घर लपटों से घिर गया। घर पर बाहर से ताला पड़ा होने के कारण कोई भीतर भी नहीं जा पा रहा था।
इस पर पड़ोसियों ने दंपती को घटना की जानकारी दी और आग बुझाने में जुट गए। राकेश व भुलैया चीखते-चिल्लाते घर की ओर दौड़ पड़े। आग इतनी भयावह थी कि स्वाती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि रागिनी को कानपुर रेफर किया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। आग से घर पर बंधी बकरियां भी जलकर मर गई। सीओ अनिल कुमार ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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अमौली। चांदपुर थानाक्षेत्र के अयोध्या का डेरा गांव में आग लगने से दो मासूम बहनों की मौत से परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। एक के बाद दूसरी बेटी को दम तोड़ते देख मां बदहवास हो गई है। ग्रामीणों के मुताबिक यदि दरवाजे पर ताला न लगा होता तो शायद बच्ची रागिनी की जान बच जाती। उधर, प्रशासन की ओर से परिजनों को नौ लाख रुपये की आर्थिक मदद का आश्वासन दिया गया है।
अयोध्या का डेरा गांव निवासी राकेश के पास पांच बिसवा खेत हैं। वह पत्नी भुलिया के साथ मजदूरी कर परिवार का जीवन यापन करता है। राकेश का कच्चा घर है। अग्निकांड में वह भी जल गया। दंपती की दो बेटियां स्वाती और रागिनी ही थी। स्वाती की मौत के बाद बच्ची रागिनी को लेकर मां भुलैया सीएचसी पहुंची। उसे उम्मीद थी कि रागिनी बच जाएगी लेकिन कानपुर हैलट में मां की आंखों के सामने उसकी दूसरी बेटी की भी मौत हो गई।
इससे मां बदहवास हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि घटना के समय रागिनी की नींद खुल गई थी। वह शोर मचाकर मदद के लिए बुलाती रही। दरवाजा बाहर से बंद नहीं होता तो शायद वह निकल आती। शोर सुनकर पड़ोसी रमेश, नंदू और बहनों का चाचा श्रीकेश पहुंचे थे। किसी तरह रागिनी को बाहर निकाला और आग बुझाई। एसडीएम अवधेश कुमार निगम ने मौके का जायजा लिया।
परिवार को सांत्वना देकर आठ लाख रुपये अहेतिक सहायता, 95 हजार 100 रुपये आवास के लिए और छह हजार रुपये गृहस्थी क्षतिपूर्ति का मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष मनोज निषाद,ग्राम प्रधान अनुज सिंह,संतोष गुप्ता, आशाबाबू दुबे आदि लोग मौके पर पहुंचे।
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