छुट्टी के बाद स्कूल से निकली चार साल की बच्ची को एक नकाबपोश महिला ने अगवा कर लिया। आधे घंटे के भीतर बच्ची की मां के पास फिरौती का फोन भी आ गया। सूचना मिलते ही पुलिस ने कड़ी नाकेबंदी की तो महिला हाईवे किनारे जंगल में बच्ची को छोड़ गई। बच्ची से बातचीत के आधार पर पुलिस ने एक महिला समेत तीन संदिग्धों को पूछताछ के लिए उठाया लेकिन सबूत न मिलने पर छोड़ दिया।
घटना बुधवार दोपहर साढ़े 11 बजे की है। शहर कोतवाली क्षेत्र के पक्का तालाब नई बस्ती निवासी मोहम्मद कमालुद्दीन की बेटी सदफ है। वह घर से आधा किलोमीटर दूर स्थित पारस विद्या मंदिर में यूकेजी की छात्रा है। कमालुद्दीन दुबई में नौकरी करते हैं। बुधवार को स्कूल का स्टाफ छुट्टी के बाद बच्चों को छोड़ने के लिए बाहर खड़ा था। इसी दौरान एक नकाबपोश महिला स्कूल के गेट पर पहुंची और खुद को सदफ की मां बताया। बच्ची कुछ बोल पाती, इससे पहले ही महिला झटके से उसे रोड के दूसरी तरफ ले गई।
बच्ची के अपहरण किए जाने का खुलासा तब हुआ, जब कुछ देर बाद सदफ को लेने उसकी मां शबनम स्कूल पहुंची। इस पर स्कूल प्रबंधन के होश उड़ गए। स्कूल प्रशासन ने सदफ के एक महिला संग जाने की बात कही। लगभग 11 बजकर 52 मिनट पर सदफ की मां के मोबाइल पर फिरौती की कॉल पहुंची। फोन करने वाली महिला थी। महिला ने बच्ची की जान की धमकी देकर दो लाख रुपये की डिमांड की। इस बीच स्कूल प्रशासन ने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी थी।
कोतवाली और बाकरगंज चौकी का फोर्स हाईवे पर नाकेबंदी कर बच्ची की तलाश में जुट गया। पुलिस ने कॉल को ट्रेस किया और वह नंबर मिलाया, जिससे मोबाइल पर फोन आया था। फोन किसी महिला ने उठाया। हालांकि एक बार रिसीव होने के बाद फोन स्विच ऑफ हो गया।
पुलिस की नाकेबंदी पर अपहरणकर्ता घबरा गए और बच्ची को जंगल में छोड़कर भाग निकले। भिटौरा बाईपास के जंगल में चरवाहों ने बच्ची को रोते देखा। उसके गले में लटके आईकार्ड की मदद से परिवार को मोबाइल पर सूचना दी। परिजन और पुलिस तुरंत मौके पर पहुंच गए। बच्ची के हुलिया बताने पर पुलिस ने उसी के मकान में रह चुकी महिला, उसके पति व इन्हें मकान दिलाने में मध्यस्थ रहे युवक को उठाया।
बच्ची के सामने नकाब में महिला खड़ी की गई तो वह उसे पहचान नहीं सकी। महिला के पति को भी वह नहीं पहचान सकी। 14 घंटे तक तीनों को कोतवाली में रखकर पूछताछ की गई। कोतवाल आरके पांडेय ने बताया कि संदिग्ध लोगों से पूछताछ में कोई सुराग नहीं मिले हैं। इस वजह से उन्हें छोड़ दिया गया है। तहकीकात की जा रही है। जल्द ही सुराग लग जाएगा।
महिला के साथ दो नकाबपोश थे- फतेहपुर। अच्छा हुआ अगवा की गई बच्ची मिले गई और परिवार की जान में जान आई। पुलिस की भी किरकिरी होने से बच गई। पर, इस सनसनीखेज अपहरण कांड में बच्ची की बरामदगी के बाद पुलिस की सुस्ती अपहरणकर्ताओं के हौसले बढ़ा देगी।
पुलिस ने तीनों संदिग्धों को छोड़ने के बाद किसी की धरपकड़ या सुरागकशी नहीं की है। परिजनों ने बताया कि घर लौटने पर बच्ची से आरोपियों के बारे में पूछा गया तो उसने बताया है कि सड़क पर एक गाड़ी खड़ी थी, उसमें ही नकाब पहने आंटी ने उसे बैठा लिया था और उसके बाद घुमाते रहे हैं।
गाड़ी में दो और नकाब वाले आदमी थे। एक कार चला रहा था। दूसरा साथ में पीछे बैठा था, उसके रोने पर पिटाई करने की धमकी दी गई। बच्ची की मां ने बताया कि उसके घर में कु छ महीनों से भागकर शादी रचाने वाली महिला किराये पर रहती थी। उस महिला ने मंगलवार रात ही मकान खाली किया था। इसके बाद बच्ची के साथ अपहरण की घटना हुई है।
हालांकि पुलिस का तर्क है कि उस संदिग्ध महिला को उठाकर पूछताछ की गई है। पुलिस की छापेमारी में महिला और उसका पति घर पर ही मिले थे।
उन्होंने घटना की होती तो वह मौके से फरार मिलते। पुलिस का यह तर्क भले ही सही हो, लेकिन बच्ची के अपहरण की घटना ने परिवार का सुकून छीन लिया है, उन्हें तो यह चाह है कि पुलिस अब वह असली चेहरा बेनकाब करे, जिससे उसकी नन्हीं सी जान सुरक्षित स्कूल आ और जा सके।