किशनपुर। यमुना में बढ़ते जलस्तर के कारण किशनपुर को बांदा जनपद से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग एक बार फिर पूरी तरह से बंद हो गया है। बाढ़ के पानी ने तुर्की नाले के पास से बनाए गए वैकल्पिक मार्ग को भी बहा दिया है। इससे चार पहिया वाहनों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है। वहीं स्कूली बच्चे जान जोखिम में डाल पुल को पार कर रहे हैं।
तुर्की पुल बीते एक महीने से बंद है। पुल के पास एप्रोच मार्ग धंसने के बाद खनन कारोबारियों से आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्ता तैयार किया गया था, लेकिन बाढ़ का पानी इस मार्ग को भी निगल गया। लोगों की परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ गई है। अब राहगीरों को एक किमी से ज्यादा का पैदल सफर कर टूटे पुल के जरिये आवागमन करना पड़ रहा है। इसके साथ यमुना पार के गांवों से खागा और अन्य कस्बों में पढ़ने जाने वाले बच्चे टूटे हुए पुल से जोखिम उठाकर स्कूल पहुंच रहे हैं। पुल पार करने के दौरान बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं है। इससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।
यमुना तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा
असहट, जालंधरपुर, गढ़ा, सेंधारी, बिकौरा, गुरवल, मड़ौली, नरौली समेत एक दर्जन गांवों तक यमुना का पानी फिर से पहुंच गया है। यदि पानी की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो नागाबाबा पुलिया होकर पहाड़पुर का रास्ता भी जल्द ही बंद हो सकता है।
इनसेट:
छठवीं बार टूटा तुर्की पुल
तुर्की नाले पर बना पुल निर्माण के बाद से अब तक कभी चार महीने भी लगातार नहीं चल पाया है। घटिया निर्माण कार्य इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। इस साल अप्रैल में मिट्टी भराई के बाद शुरू किए गए पुल का रास्ता जून में बाढ़ से फिर धंस गया। पीडब्ल्यूडी के अवर अभियंता अनिल कुमार शील ने बताया कि बार-बार हो रही क्षति को देखते हुए इस बार कानपुर के आईआईटी इंजीनियरों की टीम से पुल की मरम्मत का नया डिजाइन तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही काम शुरू किया जाएगा।
फोटो-01-टूटे पुल को पार कर स्कूल जाते बच्चे। संवाद