फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fatehpur News: खादी ने बदली चाल, युवाओं की पसंद ने बदला बाजार

विज्ञापन
फोटो-10-शिवकुमार तिवारी, व्यवस्थापक। संवाद
विज्ञापन
फतेहपुर। खादी अब सिर्फ सादगी और गांधी टोपी तक सीमित नहीं रही। कभी मोटे और खुरदरे कपड़े की पहचान रही खादी ने बदलते फैशन के साथ ऐसा रूप बदला है कि अब जेन-जी भी इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं।
विज्ञापन

मसलिन, पोली और सिल्क जैसी हल्की व मुलायम खादी युवाओं को खूब पसंद आ रही है। कुर्ते और शर्ट से लेकर टॉप, दुपट्टे और दूसरे परिधानों तक खादी की नई वैरायटी बाजार में अपनी जगह बना रही है। खास बात यह है कि इसमें खादी की पहचान भी बरकरार है और आधुनिक पहनावे का अंदाज भी।
गांधी जयंती के अवसर पर खादी वस्त्रों पर 30 प्रतिशत की छूट दी जा रही है। इसका लाभ 31 मार्च तक लिया जा सकेगा। छूट के चलते ग्राहकों के बीच खादी की खरीद को लेकर उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।
विज्ञापन



फैशन की चाल के साथ खादी ने भी बदली चाल
पहनावे में बदलाव आया तो खादी ने भी खुद को उसी के अनुरूप ढाल लिया। पहले मोटे कपड़े की खादी की मांग रहती थी, लेकिन अब गर्मी और रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए हल्के, पतले और आरामदायक कपड़ों को तरजीह मिल रही है। मसलिन और पोली के साथ सिल्क खादी की मांग भी बढ़ी है।
इन कपड़ों की खासियत यह है कि पारंपरिक खादी का स्वरूप बरकरार रहते हुए इन्हें आधुनिक पहनावे में आसानी से शामिल किया जा सकता है। शरीर के अनुकूल रहने वाली खादी मौसम के हिसाब से भी आराम देती है। हाथ से तैयार होने के कारण इससे स्थानीय कारीगरों और बुनकरों की मेहनत जुड़ी है। ऐसे में खादी की खरीद उनकी आजीविका को भी सहारा देती है।


सादगी में स्टाइल, जेन-जी को भाया फैशन
जेन-जी के फैशन में अब केवल चमक-दमक नहीं, बल्कि आराम, सादगी और अपनी अलग पहचान भी मायने रखती है। खादी इसी पसंद के साथ कदम मिलाती नजर आ रही है। आधुनिक डिजाइन और रंगों में सादे खादी के कपड़े युवाओं को आकर्षित कर रहे हैं। खादी की शर्ट, कुर्ते और हल्के कपड़ों की मांग बढ़ी है। कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर नौकरीपेशा लोग तक इसे रोजमर्रा के पहनावे के विकल्प के तौर पर पसंद कर रहे हैं।


पहले ग्राहक मोटे कपड़े की खादी ज्यादा पसंद करते थे, लेकिन अब युवा हल्की और मुलायम खादी पूछते हैं। मसलिन और सिल्क जैसी वैरायटी में उन्हें पारंपरिक कपड़े के साथ आधुनिक लुक भी मिल जाता है।
- मेवाराम कटियार, अध्यक्ष खादी ग्रामोद्योग।


ग्राहकों की पसंद में काफी बदलाव आया है। अब लोग केवल गांधी जयंती या विशेष अवसरों पर ही खादी नहीं खरीदते, बल्कि रोजाना पहनने के लिए भी इसकी मांग कर रहे हैं। 30 प्रतिशत छूट से भी ग्राहकों को खादी खरीदने का अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल रहा है।
- शिवकुमार तिवारी, व्यवस्थापक, खादी ग्रामोद्योग।

फोटो-10-शिवकुमार तिवारी, व्यवस्थापक। संवाद

फोटो-10-शिवकुमार तिवारी, व्यवस्थापक। संवाद

फोटो-10-शिवकुमार तिवारी, व्यवस्थापक। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें