इंदौर-पटना एक्सप्रेस हादसा जिले के मलवां रेलवे स्टेशन के पास कालका मेल के हादसाग्रस्त होने की याद ताजा कर गया। रविवार को ही यहां कालका मेल हादसा हुआ था। इंजन समेत 12 कूपे पटरी से उतर गए थे। इनमें से चार कूपे तो एक-दूसरे पर चढ़ गए थे। चीख पुकार की आवाज के बीच चारों ओर दहशत फैल गई थी। 65 से ज्यादा लोगों की जान गई थी, इनमें एक स्वीडन का भी निवासी था। घायलों की संख्या सैकड़ों थी। बचाव कार्य के लिए पुलिस व प्रशासन के साथ बड़ी संख्या में समाजसेवी आगे आए थे। यहां भी सेना को मोर्चा लेना पड़ा था।
बता दें कि हावड़ा से दिल्ली जा रही कालका मेल 10 जुलाई 2011 की दोपहर सवा 11 बजे मलवां रेलवे स्टेशन से चंद कदम पहले हादसाग्रस्त हुई थी। हादसा इतना वीभत्स था कि देखने वाले कई महीनों तक इस लम्हे को भूल नहीं पाए थे। तत्कालीन रेल मंत्री खुद मौके पर आए थे।
उन्होंने हादसे की तह तक जाने के लिए बकायदा एक जांच कमेटी गठित की थी। साल-दर साल बीतता गया लेकिन आज तक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। यह नहीं पता चल सका कि हादसा क्यों और कैसे हुआ था। हालांकि चालक को प्रथम दृष्टया दोषी माना गया था। जनता आज तक उस वजह को जानने के लिए उत्सुक रहती है।