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आठ रुपये किलो के भाव से बेच दी गईं किताबें

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शाह। परिषदीय स्कूल के छात्रों के लिए आईं किताबें औने-पौने दाम में कबाड़ी को बेच दी गई। मामला तब उजागर हुआ, जब कबाड़ी किताबों को लादने के लिए लोडर लेकर आ गया। कुछ लोगों के फोटो खींचने और पुलिस के आने की सूचना पर वह भाग निकला। स्कूल के प्रधानाचार्य से लेकर बीएसए तक ने ऐसी किसी घटना की जानकारी से इनकार किया है।
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मामला मंगलवार शाम का है। लोडर में सरकारी किताबें बंडल-बंडल लादी जा रही थीं। इसी बीच गांव के कुछ लोग पहुंच गए। संतोषजनक जवाब न मिलने पर फोटो खींचना और वीडियो बनाना शुरू कर दिया। सरकारी किताबें बेचे जाने की सूचना पर शाह चौकी से पुलिस पहुंची। तब तक कबाड़ी किताबों को फेंककर लोडर लेकर भाग निकला। हालांकि विद्यालय परिसर में कोई भी यह बताने के लिए तैयार नही था कि किताबें किसने बेची और किसके माध्यम से बेची जा रही थीं। विद्यालय में किताबों का डंप होना भी अपने आप में सवाल खड़ा करता है। ग्रामीणों का कहना है कि आखिर किताबें छात्रों को वितरित क्यों नही की गईं, यदि वितरण के वाद किताबें शेष बची थीं तो उन्हें वापस अभी तक जमा क्यों नही किया गया। प्रकरण में जब प्रधानाचार्य जगतपाल सिंह और सहायक अध्यापक धीरेंद्र सिंह सेंगर से फोन पर पूछा गया तो उनका कहना था कि दोपहर तीन बजे विद्यालय बंद कर वह लोग चले गए थे। उसके बाद क्या हुआ, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि उनके पास यह शिकायत नहीं आई है, इसकी छानबीन कराकर यदि कोई दोषी हुआ तो कार्रवाई होगी।
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