हजरत मोहम्मद साहब की पैदाइश का जश्न सोमवार के दिन ईद-ए- मिलादुन्नबी के रूप में मनाया जाएगा। मुस्लिम कौम पैगंबर साहब के इस खास समय का बेताबी से इंतजार कर रही हैं। रविवार को जगह-जगह इस्तकबाल गेट बन कर खड़े हो गए। मस्जिदों समेत अन्य इबादतगाहों को संजाया गया है। घरों में रोशनी की गई है। उल्लास, उत्साह और उमंग मुस्लिम बहुल बस्तियों में दिन भर देखने को मिली। हर शख्स को जुलूस मोहम्मदी में शरीक होने का इंतजार है।
बारावफात को ईदमिलाद के रूप में भी जाना जाता है। यह त्योहार भी रबीउल्ल अव्वल महीने की बारहवीं तारीख को पड़ता है। लिहाजा यह दिन पैगंबर साहब का याद दिन भी कहलाता है। इस दिन मोहम्मद साहब की अजीज खीर और चावल पका कर उसे गरीबों में बांटे जाने की भी रवायत है। रविवार को बारावफात की तैयारियां मुस्लिम बहुल बस्तियों में सारा दिन चलती रही। शहर के कई रास्तों पर वेलकम गेट बनाए गए हैं। छोटी और बड़ी मस्जिदों को सजाने और संवारने का काम चला। घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रोशनी की गई। काजी ए शहर कारी फरीदउद्दीन कादरी ने पैगंबर इस्लाम की यौम-ए-विलादत पर रोशनी डालते हुए जुलूस-ए-मोहम्मदी में अदब और अहतेराम के साथ शरीक होने की अपील की। कहा कि हजरत साहब ने समाज को आइना दिखाने का काम किया। अमन और भाईचारा का माहौल स्थापित कराने में पैगंबर साहब के प्रयास काबिलेगौर रहे।
काजी ए शहर ने बताया कि मोहम्मद-ए-जुलूसी शहर के जीटी रोड स्थित बाकरगंज चौराहा से उठेगा। यह मुखलाल पाल स्वीट्स हाउस वाली गली से होता हुआ लल्लू मियां की कोठी, कोतवाली रोड, स्टेशन रोड जैसे कदीमों रास्तों से गुुजरते हुए रात में समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि जुलूस के दौरान अजान की आवाज सुनते ही नजदीक की मस्जिद में नमाज अदा करें। अकीदतमंद अदब और अहतेराम और बावजू के साथ दरूद शरीफ व नात पढ़ें।