रबी फसलों की सिंचाई आते ही सरकारी मशीनरी ने धोखा
देना शुरू कर दिया है। जिले की सबसे बड़ी परियोजना जरौली पंप कैनाल एक
सप्ताह से बंद है। फसलों की सिंचाई को लेकर क्षेत्र के किसानों असमंजस में
है। नहर के आसपास सिंचाई का दूसरा साधन भी नहीं है, जिससे किसान फसलों की
सिंचाई कर सके।
असोथर विकास खंड क्षेत्र के जरौली गांव के पास यमुना
नदी में पंप कैनाल लगा है। इसमें सात पंपों से 400 क्यूसेक पानी निकालने
वाली क्षमता की मशीनें लगी हुई हैं।
असोथर क्षेत्र के अलावा, विजयीपुर,
धाता विकास खंड क्षेत्र के किसान फसलों की सिंचाई करते हैं। इस समय गेहूं
के फसल की सिंचाई का समय चल रहा है। चार फरवरी से जरौली पंप कैनाल बंद है।
असोथर और विजयीपुर विकास खंड में नहर के आसपास फसल सिंचाई का कोई दूसरा
विकल्प भी नहीं है। कौंडर गांव के किसान ओमप्रकाश, अरुण कुमार, राजेश ने
बताया कि फसलों की सिंचाई आते ही नहर धोखा देने लगती है।
समय से नहर में
पानी नहीं आता है। जब फसलें सूख कर बर्बाद हो जाती हैं, तब पानी आता है।
इससे फसलों में पर्याप्त मात्रा में पैदावार नहीं होती है।
अधिशासी
अभियंता, निचली गंगा नहर वैभव सिंह ने कहा कि इलाहाबाद के माघ मेला में
अमावस्या के स्नान को लेकर शासन के आदेश पर पंप कैनाल बंद है। स्नान पर्व
समाप्त होते ही पंप कैनाल चालू करा दिया जाएगा।