ईदुल फितर का त्योहार गुरुवार को जिले में जोशो खरोश से मनाया गया। सारा दिन ईद की खुशियाें से परिवार गुलजार होते दिखे। ईदगाह व इलाकाई मस्जिदों में खास नमाज अदा हुई। इस दौरान परिवार, समाज के साथ ही मुल्क में अमन और चैन की दुआ मांगी गई। आतंकवाद के खात्मे के लिए भी हाथ जुड़े। नमाजियों ने कहा कि आतंकवादी किसी मजहब का हितैषी नहीं हो सकता। वह शैतान हैं और शैतान ही रहेंगे।
जिला मुख्यालय स्थित ईदगाह में ईद की नमाज सुबह साढ़े आठ बजे शुरू हुई। नमाज अदा करने के लिए जुटे अकीदतमंदों से बड़ा मैदान पूरा भर गया। बड़ों के साथ नए-नए कपड़ों में सजे बच्चों ने अपने नन्हें हाथों से अल्लाह से दुआ मांगी। अल्लाह हू अकबर की गूंज के बीच शहर काजी सईदुल इस्लाम अब्दुल्ला ने नमाज के जुटे हजारों नमाजियों को अल्लाह के वसूलों पर अमल करने की सीख दी। उन्होंने फिरकापरस्त ताकतों से समाज को होशियार रहते हुए मुल्क के लिए काम करने की गुुजारिश की। मोचियानी मस्जिद में बड़ी तादाद में नमाजी जुटे, इन्हें काजी-ए-शहर कारी फरीदउद्दीन कादरी ने नमाज पढ़ाई। कहा कि आतंकवादी विश्व शांति का कत्ल कर रहे हैं।
शहर काजी ने दिया गुलदस्ता- ईदगाह परिसर में प्रशासन पंडाल में मौजूद डीएम डॉ. वेदपति मिश्र, एसपी कलानिधि नैथानी, एडीएम आलोक सिंह व नगर पालिका चेयरमैन चंद्र प्रकाश लोधी को शहर काजी ने गुलदस्ता भेंट किया। अफसरों ने भी गले मिलकर लोगाें को ईद की मुबारकबाद दी। डीएम ने कहा कि ईद का त्योहार जिंदगी में मिठास घोलता है। भाईचारा और अमन चैन बढ़ता है।
साजिदा ने गुड़िया, अकरम ने खरीदा डोरेमोन- ईदगाह मैदान में बड़ों के साथ इबादत को पहुंचे बच्चाें के लिए दुकानें सजी थीं। आबूनगर की सात साल की साजिदा गुड़िया के लिए मचली तो अब्बू शाकिर अली से रहा नहीं गया। तुराबली का पुरवा के चार साल के असलम बड़े भाई अकरम के साथ ईद की नमाज में आए थे। लौटते वक्त यह मासूम भाई से अपना हाथ छुड़ाकर डोरेमोन खरीदने जा पहुंचा। दुकान से तभी हिला, जब डोरेमोन मिल गया।
भाई जान, एक चम्मच में क्या होगा:- ईद की नमाज के बाद घरों में मेहमान नवाजी का दौर चला। एक-दूसरे के घर पहुंचकर ईद व अन्य लजीज व्यंजन का आनंद लिया। हर चौखट खातिरदारी में यह जरूर रहा कि भाई जान, भाभी आपने तो एक ही चम्मच खाया, एक चम्मच सिवईं में क्या होगा? ईद की मुबारकबाद देने के लिए मुस्लिम भाइयों के घरों में बड़ी तादाद में हिंदू भी पहुंचे।
ईदी ने भर दी विकलांग माजिद की झोली- ईदगाह को जाने वाले रास्तों के दोनों छोर पर गरीब व लाचार नजर आए। नमाज अदा कर लौटते वक्त हर नमाजी इन मजलूमाें के फैलते हाथों पर कुछ न कुछ डालता नजर आया। ईदी देने की मुस्लिम मजहब में खास अहमियत होने से हाथ फैलाए जमीन पर बैठे लोगों की झोली भरती रही। ईदी लेने वाले हाथ अपनी ओर बढ़ते हाथों को चूमकर ईद की खुशियों को चार चांद लगाते रहे। विकलांग माजिद भी इनमें से एक था, जिसका कोई सहारा नहीं है। ऐसे में उसके लिए ईद का दिन सबसे अहम था। यही वजह थी कि वह बार- बार हाथ में पकड़े कटोरे में डाले जा रहे रुपयों को टटोलने की कोशिश कर रहा था।
और निकल पड़े मौजमस्ती को टीन एजर्स- एक महीने तक इबादत में तल्लीन रहने की वजह से मौजमस्ती से दूर रहे टीन एजर्स की बाइकों ने खूब फर्राटा भरा। बड़ों ने भी आज के दिन उन्हें न तो रोका और न ही टोका। लिहाजा एक बाइक पर तीन-तीन युवा हिप-हिप-हुर्रे करते देखे गए।
ग्रामीणांचल में भी ईद की धूम:- ईद की खुशियाें ने दोआबा की सरजमीं को सराबोर कर दिया। सदर तहसील क्षेत्र के हुसैनगंज, थरियांव, बहुआ, असोथर, मलवां, सौंरा, गाजीपुर, भिटौरा समेत अन्य स्थानों पर ईद की नमाज अदा कर एक दूसरे को मुबारकबाद दी गई। उधर, मस्जिदाें मेें बारिश को देखते हुए नमाजियों को बचाने के उपाय कर रखे गए थे हालांकि इनकी जरूरत नहीं पड़ी।