अमर उजाला दफ्तर में बाबूलाल से बच्चे को अपनी सुपुर्दगी में लेने के बाद खुश परिजन
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तीन महीने से मां अर्चना से जुदा शिब्बू की जिंदगी में बहार आ गई। अमर उजाला में शनिवार को ‘लावारिस शिब्बू का सहारा बने निशक्त दंपति’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद मां के अंाचल से दूर शिब्बू को अपनों की करीबियां नसीब हुईं। जिले में रहने वाले एक रिश्तेदार से खबर सुनने के बाद मासूम के मामा अन्य परिजनों के साथ आए। यकायक सामने आए मासूम के रिश्तेदारों पर संदेह के आधार पर मोहल्ले के लोग भड़क उठे लेकिन बच्चे को मामा से लिपटता देख कर उनका भी दिल पसीज गया। इसके बाद गुमशुदा शिब्बू को कोतवाली पुलिस ने परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। वहीं मासूम की मां का अभी भी पता नहीं है। वह शिब्बू के साथ अंतिम बार चौडगरा में देखी गई थी।
कानपुर देहात के रसूलाबाद थाना क्षेत्र के बसगढ़ा निवासी दिनेश सिंह ने 29 फरवरी को शिब्बू की गुुमशुदगी की रिपोर्ट स्थानीय थाने में दर्ज कराई थी। जिसमें शिब्बू को अपनी मां अर्चना के साथ लापता होना दिखाया गया था। अर्चना दिनेश सिंह की चचेरी बहू है। अमर उजाला की शुक्रवार को गुमशुदा शिब्बू से ज्वालागंज चौराहा में मुलाकात हुई।
शहर के तांबेश्वर मंदिर के पीछे कांशीराम कालोनी में रहने वाले रिक्शाचालक निशक्त बाबूलाल और उनकी नेत्रहीन पत्नी रामावती शिब्बू को तीन महीने से पाल रहे थे। यह खबर प्रकाशित हुई तो कल्याणपुर थाना क्षेत्र के गुनीर गांव में रहने वाले शिब्बू के मामा राजन के रिश्तेदार राजेंद्र सिंह ने संदेह के आधार पर राजन को सूचना दी।
सूचना पर दोपहर राजन अपने स्थानीय रिश्तेदारों के साथ अमर उजाला दफ्तर आए। यहां से कांशीराम कालोनी गए तो वहां पर पड़ोसियों ने उन्हें घेर लिया। समझाने और मासूम के अचानक मामा से लिपट जाने पर इनका भी दिल पसीज गया। कोतवाली में एसओ के सामने मासूम के रिश्तेदारों ने उसकी फोटो समेत अन्य जरूरी दस्तावेज व गुमशुदगी की तहरीर दिखाई। इसके बाद बच्चे को मामा के सुपुर्द कर दिया गया। मामा ने अमर उजाला को धन्यवाद देते हुए बताया वह तो आस छोड़ चुके थे। अब उनकी बहन की तलाश बाकी है जो आखिरी बार भांजा के साथ चौडगरा क्षेत्र में देखी गई थी।