नगर पालिका क्षेत्र के शेखपुर उनवां गांव की एक हजार की आबादी के बीच स्थित एकमात्र कुआं जहां सूख चुका है वहीं दो इंडिया मार्का हैंडपंपों में एक खराब है। दूसरे हैंडपंप से कुछ घंटे बाद बालूयुक्त पानी निकलने लगता है। गांव के किनारे एक ग्रामीण का लगा एकमात्र नलकूप ग्रामीणों की प्यास बुझा रहा है। ग्रामीणों को खेतीबाड़ी के अलावा पेयजल के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ती है।
शहर सीमा से करीब तीन किमी उत्तर में मुस्लिम आबादी का शेखपुर उनवां गांव है। गांव के आसपास स्थित तीनों तालाब सूखे पड़े हैं और मस्जिद के पास स्थित एकमात्र कुएं का महीने भर पहले पानी सूख चुका है। गांव के दक्षिण और उत्तरी किनारे पर दो इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं, लेकिन उत्तरी किनारे पर लगा हैंडपंप खुला पड़ा है।
गांव किनारे शकील का नलकूप लगा है। नलकूप से पांच सौ मीटर दूर खेत में पाइप से पानी की सिंचाई होती है। नलकूप मालिक के दरवाजे पर महिलाएं और बच्चे खाली बर्तन लिए पानी की आस खड़े रहते हैं। गांव में पेयजल की समस्या देखने के बाद भीड़ देख अमर उजाला की टीम नलकूप के पास रुक गई।
छायाकार के कैमरा निकालते ही महिलाएं खीझ उठीं। कहने लगी तमाम लोग आए और फोटो खींचकर चले गए। सभासद चुनाव जीतने के बाद दोबारा चेहरा दिखाने नहीं आया। बूंद-बूंद पानी को लोग तरस रहे हैं। नलकूपों के सहारे पानी की प्यास बुझानी पड़ रही है। पानी भरने के लिए नलकूप मालिक की आरजू मिन्नत करनी पड़ती है।
ऐसी हालत में उन्हें फोटो नहीं खिंचवानी है। काफी समझाने के बाद उन्हें विश्वास हुआ कि सामने खड़े लोग नगर पालिका से संबंधित नहीं है, तो थोड़ा गुस्सा कम हुआ। तरन्नुम बानो ने बताया कि पानी न होने के कारण दो-दो तीन-तीन दिन लोग स्नान नहीं करते हैं। कपड़ों की सफाई के लिए कोसों दूर नहरों या तालाबों में जाना पड़ता है।
गुलाम शाबिर ने कहा कि गांव में पानी का ऐसा संकट जीवन में कभी नहीं देखा। जंगल में लगे नलकूपों से पानी लाते हैं। बिजली जाने पर जंगल में महिलाएं और बच्चे घंटों लाइन लगाए बैठे रहते हैं। बिजली आने पर पानी के लिए मारामारी मचती है।
अनीस अहमद बोले कि गांव में पानी का अकाल है। अगर नलकूप न चलें, तो ग्रामीण प्यास से मर सकते हैं। गंभीर समस्या को लेकर कई बार ग्रामीण डीएम की चौखट पर दस्तक दे चुके हैं, लेकिन समस्या दिन प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है।
मो. अतीक कहते हैं कि स्नान करने व कपड़ों की धुलाई के लिए शहर रिश्तेदारी में जाना पड़ता है। नलकूपों से पानी भरने के लिए तेज धूप में जंगल में घंटों बैठना पड़ता है। कभी बिजली नहीं आती, तो गांव किनारे लगे पंपिंग सेट से पानी भरा जाता है। इसके बदले में डीजल खर्च उठाना पड़ता है।
जुबैदा बेगम बोलीं कि जीवन में अब पानी का महत्व समझ में आया है। आधी बाल्टी पानी में सभी बर्तन डुबो-डुबो कर दिनभर धुले जाते हैं। उसी पानी से हाथ भी धोए जाते हैं। रोज स्नान नहीं कर पाते हैं। ऐसा पानी का अकाल अल्लाह किसी को न दिखाए।
जलकल विभाग के जेई गौरीशंकर पटेल ने बताया कि रविवार को टीम के साथ शेखपुर उनवां गांव जाएंगे। खराब हैंडपंप अगर ठीक हो सकता है, तो तत्काल ठीक कराकर चालू करा दिया जाएगा। न ठीक होने पर प्राथमिकता के साथ इस गांव में नया हैंडपंप लगाने के लिए जलकल को लिखा जाएगा।