‘धरती के भगवान’ एक बार फिर से मानवीय संवेदनाओं से खिलवाड़ करते नजर आए। खून की कमी से सदर अस्पताल लाई गई एचआईवी ग्रसित महिला को डॉक्टरों ने इलाज करने से मना कर दिया।
लगभग साढ़े पांच घंटे पीड़िता दर्द से कराहती रही। डाक्टरों के सामने रोने गिड़गिड़ाने के बाद तीमारदारों ने मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से की।
तब जाकर एचआईवी ग्रसित महिला को भर्ती किया जा सका। अभी दो दिन पहले ही जिला महिला अस्पताल में देवमई की एक एचआईवी प्रसव पीड़िता को डॉक्टरों ने छूने से मना कर दिया था, इसके बाद उसे कानपुर के डफरिन अस्पताल ले जाना पड़ा था।
असोथर पीएचसी के एक गांव की महिला को सोमवार की सुबह साढ़े नौ बजे सदर अस्पताल लाया गया। यह महिला तीन साल से एचआईवी संक्रमण की चपेट में है।
सदर अस्पताल के एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र की रिपोर्ट के आधार पर इस महिला का कानपुर के एआरटी सेंटर में उपचार चल रहा है।
पीड़िता के पति ने बताया कि पत्नी की कराई गई जांच में खून की कमी उजागर होने पर अस्पताल लाना पड़ा। वह ओपीडी के चैंबर नंबर छह में बैठे चिकित्सक के पास पहुंचे तो उन्होंने बीमारी बताने को कहा।
एचआईवी ग्रसित होने की जानकारी होते ही इस डॉक्टर ने किसी काम का बहाना बनाते हुए चैंबर छोड़ दिया। इसके बाद वह इमरजेंसी रूम पहुंचे, वहां पर भी कोई तवज्जो नहीं दी गई।
दोपहर दोबजे तक किसी ने महिला की सुध नहीं ली तो उन्होंने सीएमएस को मोबाइल पर मामले से अवगत कराया। सीएमएस के दखल के बाद आखिरकार एचआईवी ग्रसित महिला को भर्ती कराया गया।
इस प्रकरण पर सीएमएस डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि जिस वक्त एचआईवी ग्रसित महिला के पति की कॉल आई थी, वह एक विभागीय बैठक में थे। उन्होंने तत्काल अस्पताल में फोन कर महिला को भर्ती करने के निर्देश दिए।