फतेहपुर। हाईकोर्ट प्रयागराज ने डीआईओएस कार्यालय के लिपिक का सात साल जेल में रहने की अवधि के वेतन भुगतान का आदेश दिया है। लिपिक 2009 से 2016 तक जेल में रहे हैं। वह बराबर वेतन की मांग कर रहे थे, लेकिन विभाग बकाया वेतन का भुगतान नहीं कर रहा था।
डीआईओएस कार्यालय के वर्तमान में प्रधान सहायक अनिल कुमार सिंह समेत सात लोग 2009 में हत्या के मुकदमे में जेल चले गए थे। मामला संगीन होने के कारण सभी आरोपियों की जमानत नहीं हुई। 2016 में लिपिक समेत पांच लोग बरी कर दिए गए थे और दो लोगों को आजीवन कैद की सजा हुई थी। दोनों आरोपी हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर हैं। दोषमुक्त होने के बाद डीआईओएस ने उन्हें बहाल करते ही राजकीय बालिका इंटर कालेज में नियुक्ति दी।
वर्तमान में अनिल कुमार सिंह डीआईओएस कार्यालय में प्रधान सहायक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि जेल जाने के बाद उन्हें छह महीने तक आधा वेतन मिला, लेकिन इसके बाद 75 प्रतिशत वेतन का भुगतान हुआ। बहाल होने के बाद वह बकाया वेतन मांग रहे थे, लेकिन विभाग ने सुनवाई नहीं की। मजबूरन उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली और हाईकोर्ट ने उन्हें 30 दिन के अंदर वेतन भुगतान देने के लिए डीआईओएस को आदेश दिया है।