खजुहा व अमौली विकास खंड के दर्जनों गांवों में 12 दिन से फैली संक्रामक बीमारी फैली है। गुरुवार रात एक और मासूम की बुखार से मौत हो गई। क्षेत्र में मरने वालों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इसके पहले एक वृद्ध व तीन महिलाओं की हुई मौत से गांव में दहशत है। इन गांव में डाक्टरों की टीम का जाना भी बंद हो गया है। आक्रोशित ग्रामीणों ने कहा कि अब स्वास्थ्य विभाग के डाक्टरों से विश्वास उठ गया है।
गांव ललियापुर निवासी रामप्रताप के बुखार से पीड़ित बेटे आशू(7) की मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि उसे बुधवार की रात तेज बुखार आया था। जिसे सीएचसी बिंदकी में भर्ती कराया गया। यहां इलाज के दौरान हालत चिंताजनक देख डाक्टरों ने कानपुर के लिए गुरुवार देर रात रेफर कर दिया, रास्ते में मौत हो गई।
इसके पहले एक सप्ताह के अंदर खजुहा विकास खंड के गांव भारतपुर निवासी बुखार से पीड़ित वृद्ध रघुनंदन, गांव बहादुरपुर निवासी मकसूद खां की पत्नी रम्मोबीबी की सोमवार रात व बुधवार की रात गांव गंगौली निवासनी दुर्गी, क्योटरा निवासिनी रंजना देवी की मौत से क्षेत्र में दहशत है। बुखार से पीड़ित दर्जनाें लोगों का कानपुर में इलाज हो रहा है।
परिजनों के मुताबिक इन्हें डेंगू बुखार होने की पुष्टि हुई है। खजुहा व अमौली विकास खंड के गहरूखेड़ा, बरवा, मेढ़ापाटी, गोविंदपुर, बिलारी, अदमापुर, रिठवां, आवाजीपुर, मकरंदपुर, दपसौरा, बंथरा सहित दर्जनों गांव में फैली संक्रामक बीमारी से सैकड़ों मरीज जीवन और मौत से संघर्ष कर रहे हैं। यहां अब डाक्टरों की टीमे भी नहीं पहुंच रहीं है।
जिससे बीमारी विकराल रूप धारण करती जा रही है। दर्जनों मरीज कानपुर, मऊदेव, उमरिहा बाजार, अमौली, जोनिहां, बिंदकी, जहानाबाद के निजी अस्पतालों व झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने के लिए मजबूर हैं। खजुहा पीएचसी इंचार्ज डाक्टर आरकेे सिंह का कहना है कि संविदा के डाक्टरों, कर्मचारियों की हड़ताल के कारण उनके पास आदमियों की कमी है, इसलिए टीमें नहीं पहुंच पा रही है।