पहले पानी के अभाव में बर्बाद हुए और अब पानी का फैलाव बर्बाद कर रहा है। पानी ने खेती के भरोसे जिंदा रहने की आस ही खत्म कर दी है। यह हाल है हंसनापुर गांव के किसानों का। नहर कटने के बाद इन गांव के किसानों को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।
पिछले दिनों पलनहा नहर के टूट जाने से हंसापुर गांव पानी-पानी हो गया है। खेत तलैया बन गए हैं। गेहूं की फसल पानी में डूबी हुई है। किसान खेतों में भरे पानी को निकालने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन उसे सफलता हाथ नहीं मिली है।
सूखा पहले ही तबाह कर चुका है। किसी तरह खेत में गेहूं की बुवाई हुई। पहली सिंचाई के बाद फसल लहलहा रही थी कि नहर टूट गई और किसानों की फसल डूब गई। किसान यह सोच कर कांप उठते है कि वे बैंक से लिया गया कर्जा कैसे चुकता करेंगे।
परिवार के भरण पोषण के साथ पशुओं की चिंता सताने लगी है। नहर के पानी से बर्बाद हुई किसानों की फसल को राजस्व व सिंचाई विभाग का एक भी कर्मचारी देखने नहीं आया है।
किसान नयन सिंह यादव ने बताया कि कुल तीन बीघा खेती है, जिससे परिवार का पालन पोषण होता है। धान की फसल में सूखा पड़ने से खाद व बीज का रुपया दुकान में उधार है।
गेहूं की फसल में पैदावार की कुछ आस दिखाई दे रही थी, जिसमें अचानक नहर के पानी से आई बाढ़ ने एक झटके में बर्बाद कर दिया। मजदूरी कर परिवार को दो वक्त की रोटी दी सकती है। दुकान में उधार खाद, बीज का रुपया कैसे चुकाया जाए।
किसान निर्मल सिंह ने बताया कि परिवार के पालन पोषण का खेती ही एकमात्र सहारा है। केसीसी से लोन लेकर खाद, बीज खरीद कर गेहूं के फसल की बुआई की थी।
सिंचाई खंड अधिकारियों की लापरवाही से एक झटके में सब कुछ बर्बाद कर दिया। सिंचाई खंड केे कर्मचारी माइनरों की देखरेख नहीं करते हैं।
किसान सुदामा देवी के अनुसार पांच बीघा गेहूं की फसल डूब गई है। खेत में एक फुट पानी भरा हुआ है। पानी को बाहर निकालने का कोई विकल्प नहीं है। परिवार का पेट तो मेहनत मजदूरी से भरा जा सकता है, लेकिन गेहूं की फसल बर्बाद होने से भूसा नहीं होगा। पशुओं के लिए भूसा कहां से मिलेगा।
किसान भगवंत प्रसाद ने बताया कि पावर ग्रिड के पास लखनऊ रोड में पुलिया का निर्माण हो रहा है। कार्यदाई संस्था ने माइनर में बंधा लगा रखा है, जिससे माइनर का पानी ओवरफ्लो हो गया और क्षेत्र के किसानों को तबाह कर दिया।
किसानों की बर्बादी में पुलिया निर्माण कराने वाली कार्यदाई संस्था और सिंचाई खंड दोषी हैं। नहर के पानी से पूरे गांव के किसान बर्बादी की कगार पहुंच गए हैं।