जय माता दी और सांचे दरबार की जय के जयकारों के साथ
भक्तों ने देवी मंदिरों में मां की आराधना की। द्वितीय और तृतीया की तिथि
एक साथ होने की वजह से भक्तों ने मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी और
तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा के दर्शन किए। घरों में श्रद्धालुओं ने व्रत रख कर
देवी मइया की स्तुति की। कन्याओं को भोज कराने का भी सिलसिला शुरू हो गया
है।
रविवार को दूसरे दिन मां आदि शक्ति के द्वितीय स्वरूप
ब्रह्मचारिणी और तृतीय स्वरूप चंद्रघंटा की विधि विधान से पूजा अर्चना की
गई। देवी मंदिरों में या देवी सर्व भूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता,
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: मंत्रोच्चारण की गूंज रही।
भक्तों
ने मां को श्वेत मालाएं अर्पण की और मां भगवती से जीवन में अंधकार मिटाने
की कामना की। विद्यार्थियों ने भी देवी मां के स्वरूप की उपासना कर ओम
ब्रह्मचारिणी दैव्ये नम: मंत्र का जाप किया।
इसी प्रकार मां
चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त पर घंटा है। भक्तों ने चंद्रघंटा की
स्तुति की। शीतला माता मंदिर, कालिका मंदिर और दुर्गा मंदिर में भक्तों ने
पहुंच कर पूजा अर्चना की।