फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीएसटी: तकनीकी खामियों का जुर्माना भर रहे व्यापारी

विज्ञापन
विज्ञापन
फतेहपुर। वस्तु एवं सेवाकर यानी जीएसटी की तकनीकी खामियां व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब हैं। जीएसटी पोर्टल का सर्वर हर महीने में पंद्रह से बीस दिन ठप रहता है। ऐेसे में व्यापारी टैक्स का रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते। खराब सर्वर होने के बाद भी रिटर्न दाखिल में देरी होने पर विभाग जुर्माना वसूलना नहीं भूलता।
विज्ञापन

जनपद में जीएसटी में छोटे और बड़े मिलाकर तकरीबन पांच हजार व्यापारी पंजीकृत हैं। वह जीएसटी की हर पल बदलती व्यवस्था और खराब नेटवर्किंग से आजिज आ चुके हैं। व्यवस्था लागू होने के बाद से अभी तक वार्षिक रिटर्न दाखिल करने का कोई एक प्रोफार्मा निर्धारित नहीं हो सका है। साल भर व्यापारियों से संशोधन मांगे जाते हैं। जिस प्रारूप में व्यापारी वार्षिक जीएसटी रिटर्न अपलोड करता है, उसी में संशोधन मांगे जाने पर दोबारा बदला हुआ प्रोफार्मा नजर आता है। ऊपर से पोर्टल पूरा अंग्रेजी भाषा में होने से ग्रामीण क्षेत्र के व्यापारियों को आधी चीजें समझ में नहीं आतीं। जीएसटी को लेकर आ रही दिक्कतों को लेकर व्यापारियों से बात की गईं तो उन्होंने इस तरह से प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं -
इस तरह की हैं दिक्कतें :-
- हाल ही में बदली व्यवस्था के तहत एक माह की खरीद-बिक्री का विवरण तीन बार देने की व्यवस्था की गई है। जिसके तहत महीने की 1 से 10 तारीख तक बिक्री, 11 से 15 तक खरीद का मिलान और 15 से 20 तक 3बी फार्म भरा जाना है। जिसमें खरीद और बिक्री का पूरा हिसाब देना होगा। निर्धारित तिथियों में एक भी दिन विलंब होने पर पचास से दो सौ रुपये प्रतिदिन तक का है जुर्माने की व्यवस्था।
विज्ञापन

- वार्षिक रिटर्न समय पर दाखिल न हो तो उसमें भी जुर्माना हो जाता है। अभी तक पोर्टल सही नहीं रहता है। हर बार अपलोड करने पर नया संशोधन बताया जाता है। अभी तक पोर्टल पर सही फार्म अपलोड नहीं है। जब तक व्यापारी एक प्रोफार्मे के प्रपत्र तैयार करता है, तब तक दूसरा प्रारूप आ जाता है।
- वार्षिक रिटर्न के लिए चार्टर्ड एकांउटेंट से ऑडिट कराने को कहा जाता है। हर साल आयकर विभाग से ऑडिट करवाया जाता है। ऐसे में दो बार ऑडिट कराने का खर्च बढ़ जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें