बचपन में घर आंगन में फुदकती, चहचहाती गौरैया को हम सभी ने देखा है लेकिन बच्चे इस नजारे को नहीं देख पा रहे। तेजी से विलुप्त हो रही इस प्रजाति का संरक्षण न हुआ तो यह सिर्फ किताबों में दिखेंगी। कुछ इसी संकल्पना के साथ वन विभाग ने जिला अस्पताल के बाहर रविवार को पपेट शो यानी कठपुतली शो के जरिए लोगों को संदेश दिया।
विश्व गौरैया दिवस पर वन विभाग ने लोगों को कठपुतली नृत्य के जरिए जागरूक किया। कलाकारों ने संदेश दिया कि गौरैया घरों में मौजूद कीड़े, मकोड़े को खत्म करती है। इसके कई फायदे हैं। गौरैया अपने बच्चों को अल्फा व कटलम कीट खिलाती है, जो हमारी फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं।
आधुनिकता के दौर में हरे पेड़ काटे जा रहे हैं। इसी वजह से गौरैया भी कम दिखने लगी है। गौरैया को बचाने के लिए सभी लोग अपने-अपने घरों में खुली जगह किसी पात्र में खाना-पानी रख दें। हम अपने बाग-बगीचे में गौरैया के लिए लकड़ी का बाक्स लगाएं। गौरैया को संरक्षित के लिए फसलों में कीटनाशक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
वन क्ष्ेात्राधिकारी एसके श्रीवास्तव ने बताया कि लुप्त होती गौरैया के लिए मोबाइल फोन भी जिम्मेदार है। इन मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगों से गौरैया की प्रजनन क्षमता खत्म हो जाती है। झाड़ियां कटने की वजह से गौरैया पक्षी पूरी तरह बेघर होती जा रही है। डीएफओ मानिक चंद यादव ने बताया कि विश्व गौरैया दिवस पर 1012 घोसले बांटे गए हैं। सभी लोगों से अपील किया गया है कि घरोें में घोसलों को रखें जिससे विलुप्त हो रही गौरैया को घरौंदे के लिए भटकना न पड़े। इस दौरान एसडीओ टीबी सिंह, एसके राठौर, शिवराम सिंह, सुनील कुमार दुबे, शिवमंगल आदि मौजूद रहे।