फतेहपुर। जिले में गंगा और यमुना की बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है। शुक्रवार शाम गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया। यमुना का पानी भी तेजी से खतरे की निशान की ओर बढ़ रहा है। दोबारा पानी बढ़ने से पहले से प्रभावित गांवों में फिर से संकट गहराने लगा है। कई ग्रामीण घर खाली कर ऊंचे स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
गंगा का खतरे का निशान 100.86 मीटर है। शुक्रवार शाम चार बजे जलस्तर 100.87 मीटर दर्ज किया गया। पांडु और गंगा की बाढ़ से मलवां ब्लॉक के सदनहा, जाड़े का पुरवा, बिंदकी फार्म, मदारपुर, कालीकुंड़ी, बड़ा खेड़ा जैसे गांव प्रभावित हैं। कई स्थानों पर पानी गांवों में घुस चुका है।
बड़ा खेड़ा के किसान राममनोहर ने बताया कि वे कुछ दिन पहले ही राहत शिविर से घर लौटे थे, लेकिन हालात फिर वहीं पहुंचते नजर आ रहे हैं। सब्जियों और धान की फसलें नष्ट हो चुकी हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि न तो प्रशासन और न ही जनप्रतिनिधि उनकी सुध ले रहे हैं। कालीकुंडी के किसान भोदू ने बताया कि बाढ़ के बाद बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं। डॉक्टर अब तक गांव नहीं पहुंचे।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से किसी भी गांव में अब तक मेडिकल कैंप नहीं लगाया गया। मदारपुर क्षेत्र पांडु नदी की चपेट में है, और अगर गंगा का जलस्तर नहीं घटा तो पानी पांडु के रास्ते गांव में घुस जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि राहत सामग्री न मिलने से अब भोजन और जीविकोपार्जन तक का संकट खड़ा हो गया है। निजी डॉक्टरों के भरोसे ही इलाज चल रहा है।
हरी सब्जी का पैदा होगा संकट
गंगा और पांडु की बाढ़ से खरीफ की सब्जियां बर्बाद हो गई हैं। अब दोबारा फसल आने तक हरी सब्जियों की भारी कमी देखने को मिलेगी। इसका असर फतेहपुर, कानपुर के रामादेवी और उन्नाव की सब्जी मंडियों पर पड़ेगा। इससे सब्जियों के दाम बढ़ने तय हैं।
गंगा और यमुना में पानी बढ़ने का सिलसिला जारी है। बचाव की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। राहत शिविर बनाने को लेकर प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है। अगर किसी पीड़ित को कोई समस्या हो, तो वह संपर्क कर सकता है।
एसएल वर्मा, बाढ़ प्रभारी अधिकारी