बाजार में रोजा खोलने की चीजों को खरीदने को जुटे लोग ।
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रमजान माह भाईचारे का पैगाम भी दे रहा है। दूसरे अशरे के पहले जुमा की नमाज बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मस्जिद पहुंचकर पढ़ी। रोजेदारों ने अल्लाह से नेकी की राह चलने का हौसला समेत सामाजिक समरसता कायम रखने की दुआएं मांगीं। उधर, जुमा की खास नमाज के मद्देनजर पुलिस प्रशासन चौकन्ना रहा। हर मस्जिद के आसपास पुलिस का पहरा रहा। रोजा खोलने में प्रयोग होने वाली चीजाें की खरीद को बाजारों में भीड़ उमड़ पड़ी।
मुस्लिम वर्ग के लिए यह महीना इबादत का है। हर कोई अल्लाह की इबादत के लिए माकूल समय निकाल रहा है। अल्लाह को याद करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। घर में आराम फरमाने से लेकर राह चलते उन्हें याद किया जा रहा है। इस महीने की इबादत में मिलने वाले 70 गुना ज्यादा सवाब को पाने के लिए हर उम्र आगे आ रही है।
जुमा के दिन इसमें और इजाफा देखने को मिला। तड़का होने से पहले ही मुस्लिम बहुल इलाकों में मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकर से सहरी के लिए आगाह किया जाता रहा, जिसे सुनकर कुछ घंटे की नींद मारने वाले रोजेदार फिर से अल्लाह को याद करने के लिए खुद को तैयार करने लगे। जुमा की नमाज पढ़ने के लिए नौकरी पेशा करने वाले कामकाज छोड़ कर भागे और इबादतगाह पहुंच कर अल्लाह को याद किया।
जुमा की नमाज के चलते एसपी कलानिधि नैथानी ने पुलिस को अलर्ट कर रखा था। शहर की मस्जिदों से लेकर चप्पे चप्पे पर खाकी के जवान मुस्तैद थे। यही हाल गैर शहरी इलाकों का रहा। वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से फोर्स तैनात थी। नमाज में रोजेदारों ने अल्लाह से नेकी का रास्ता दिखाने की गुजारिश करते हुए समाज की बेहतरी की दुआएं मांगीं।
रोजेदारों ने मुल्क में अमनचैन कायम रखने और भाईचारा को और बढ़ावा देने की गुजारिश की। उधर, शाम ढलने से पहले मुस्लिम बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ने लगी। रोजा में प्रयोग किए जाने वाले समान को खरीदने के लिए लोग दुकानों में जमा रहे। शाम रोजा इफ्तार में भी अमन चैन की दुआएं मांग कर रोजा खोला गया।