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कोहरे से थमा जनजीवन, यातायात अव्यवस्थित

Sat, 12 Dec 2015 11:49 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, फतेहपुर
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कोहरा व शीत लहर से लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कड़ाके की ठंड में लोग घरों में दुबके रहे। पक्षी भी अपने घोसले से बाहर नहीं दिखाई दिए। दोपहर तक बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। ठंड और कोहरा में सिर्फ स्कूली बच्चे सुबह सड़क पर बैठकर बसों का इंतजार करते रहे। गलन भरी ठंड से आम जनमानस कांप उठा।
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मौसम के इस मिजाज को देखते हुए भी प्रशासन ने ठंड से राहत के लिए अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की है। शनिवार को सुबह से ही कोहरा छाया रहा। सूर्य देवता के लोगों को दर्शन दोपहर में थोड़ी देर के लिए हुए। इसके बाद बादल के साथ कोहरे की चादर ने पूरे शहर को ढक लिया। ठंड के प्रकोप से बचने के लिए लोग पूरे दिन घरों में दुबके रहे। बाजार और बस स्टाप में लोग रद्दी कागज व गत्ते जलाकर ठंड दूर किए। मौसम के इस करवट लेने से रेल और सड़क के यातायात पर भी असर पड़ गया है। कड़ाके की ठंड ने पशु-पक्षियों को प्रभावित कर दिया है। पक्षी ठंड व ओस से बचने के लिए अपने घोसले में घुसे रहे। भोर पहर सुनाई देने वाली चिडिय़ों की चहल पहल दोपहर में भी सुनाई नहीं दी है। कोहरा और शीतलहर का असर सीधा रेल यातायात पर भी पड़ रहा है। कोहरे सेे ट्रेनों की रफ्तार थम गई। शनिवार को एक दर्जन से अधिक ट्रेनें लेट रहीं। मुसाफिर प्लेटफार्म में बैठ कर इंतजार और पूछताछ केंद्र में जानकारी लेते रहे। हावड़ा-दिल्ली रूट के फतेहपुर स्टेशन से कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, बिहार समेत अन्य जगहों के लिए मुसाफिर ट्रेन से यात्रा करते हैं। कोहरे ने ट्रेनों की रफ्तार धीमी कर दी है। शनिवार को अप और डाउन लाइन से करीब एक दर्जन ट्रेनें लेट रहीं। प्लेटफार्म पर ठंड से ठिठुरते रहे। स्टेशन के आसपास ठंड से बचने के लिए नगर पालिका ने अभी तक अलाव की व्यवस्था नहीं की है। मुसाफिर स्टेशन की कैंटीन और आसपास के चाय की दुकानों में चाय पीकर ठंड दूर करने की कोशिश करते रहे।


स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति प्रभावित
कड़ाके की ठंड परिषदीय स्कूलों के बच्चों पर कहर बरपाने लगी है। शनिवार को ठंड बढने से स्कूलों में सिर्फ यूनिफार्म पहने बच्चे ठिठुरते रहे। एमडीएम खिलाने के बाद शिक्षकों ने नौनिहालों की छुट्टी कर दी गई। बता दें कि यूनिफार्म गरम कपड़ों का कोई प्रावधान न होने के कारण ठंड का मौसम परिषदीय स्कूल के बच्चों पर कहर बरपाता है। ऐसी हालत में परिषदीय स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति प्रभावित होना तय है। स्कूल सिर्फ वही बच्चे पहुंचते हैं, जिनको एमडीएम की जरूरत होगी। यह बच्चे भी एमडीएम खाने के बाद घर लौट जाते हैं। शिक्षक भी मजबूरी में बच्चों की छुट्टी कर देते हैं। शासन ने शरद कालीन अवकाश की व्यवस्था समाप्त कर दी है। पहले 25 दिसंबर के बाद 15 दिन का शरद कालीन अवकाश की व्यवस्था थी। अब अधिक ठंड पड़ने पर डीएम या फिर शासन स्तर से अवकाश घोषित होता है।
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