जिले में बुखार और डेंगू का प्रकोप कम नहीं हो रहा है। बुखार से सोमवार को दो महिलाओं समेत पांच लोगों की मौत हो गई। मौतों का सिलसिला न रुकने से लोगों का जिले के डाक्टरों से विश्वास उठता जा रहा है। बुखार बढ़ने पर लोग कानपुर का रास्ता पकड़ रहे हैं। गांवों में बुखार के घर-घर रोगी हैं। जानते हुए भी स्वास्थ्य विभाग अनजान बना है। गौरतलब है कि जिले में दो महीने के अंदर छह लोगों की डेंगू से और 45 लोगों की मौत बुखार व डायरिया से हो चुकी है। इस तरह जिले में अभी तक मरने वालों की संख्या 51 हो गई है।
असोथर प्रतिनिधि के अनुसार सरकंडी मजरे गटकी का डेरा निवासी हरीलाल निषाद की बेटी ननकी (13) कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। उसका इलाज गांव के झोलाछाप डाक्टर कर रहे थे। दोपहर तीन बजे किशोरी की मौत हो गई। असोथर निवासी बद्री (85) को कई दिन से बुखार आ रहा था। शाम चार बजे उनकी भी सांसें थम गईं।
बहुआ प्रतिनिधि के अनुसार असोथर पीएचसी के शंकरपुरवा गांव के राम चरन निषाद (60) को पांच दिन से बुखार आ रहा था। वह स्थानीय स्तर पर इलाज करा रहे थे। सोमवार की सुबह अचानक हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आ रहे थे, तभी रास्ते उसकी मौत हो गई।
खास बात तो यह है कि इस गांव में बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक बना है। बहुआ प्रतिनिधि के अनुसार, असोथर पीएचसी के शंकरपुरवा गांव के राम चरन निषाद (60) को पांच दिन से बुखार आ रहा था। वह स्थानीय स्तर पर इलाज करा रहे थे। सोमवार की सुबह अचानक हालत बिगड़ गई।
परिजन उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर आते उससे पहले सांसें जवाब दे गईं। इसी गांव में बुखार से पीड़ित रोगियों की संख्या दो दर्जन से ज्यादा होने पर स्वास्थ्य विभाग उदासीन बना है। बिंदकी प्रतिनिधि के अनुसार खजुहा ब्लाक के कोरवां निवासी नसीम की पत्नी अख्तरी (45) को कई दिन से बुखार आ रहा था। हालत में सुधार न होने पर परिजनों ने कानपुर के तुलसी अस्पताल में भर्ती कराया।
सोमवार को बुखार पीड़ित अख्तरी की कानपुर में मौत हो गई। शव देर शाम गांव लाया गया। शव देखते ही गांव में हड़कंप मच गया। कोरवां में अब मरने वालों की संख्या चार पहुंच गई है। इसके पहले विचित्र बुखार से कानपुर में इलाज करा रही नजबुद्दीन की पत्नी आबिदा, अनीस की बेटी मरियम व अधेड़ नजीर शाह की मौत हो चुकी है।
गांव में दो सैकड़ा बुखार पीडितों को सरकारी दवाओं से आराम न मिलने पर कानपुर, बिंदकी, फतेहपुर के प्राइवेट अस्पतालों में इलाज हो रहा है। गांव में अकील अहमद, आशिया, महरूब, अकसा, अलीशा, सफीक खां, गजाला, अफसाना, मारिया, रुसिदा, किश्वरी, महजबी को सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ग्राम प्रधान रहीसा बानाें का आरोप है कि सरकारी डाक्टरों की टीम फर्ज अदायगी कर चली जाती है। उनकी दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है।