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Fatehpur News: नकल गैंग में तीन कॉलेज के प्रधानाचार्य समेत 10 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

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फतेहपुर। थरियांव थाना क्षेत्र के पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय माध्यमिक इंटर कॉलेज में हाईस्कूल गणित के पेपर में नकल पकड़े जाने के बाद पांच साॅल्वरों समेत 10 लोगों के खिलाफ शुक्रवार देर रात पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें तीन कॉलेजों के प्रधानाचार्य शामिल हैं। साॅल्वरों को रुपये देने वाले दो लोगों के भी नाम सामने आए हैं।
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय माध्यमिक इंटर कॉलेज के केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य राकेश कुमार सिंह ने तहरीर में बताया कि शुक्रवार को पहली पाली में गणित की परीक्षा चल रही थी। सचल दल और शिक्षकों की सतर्कता से पांच सॉल्वर दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए। पकड़े गए आरोपियों में खागा निवासी लक्ष्मण कुमार, गणेश कुमार, खखरेरू कोट निवासी प्रदीप कुमार, सुजरही का रवि और एक नाबालिग शामिल है।

जांच में सामने आया कि डॉ. मेवराम दिव्य ज्ञान इंटर कॉलेज मुंराव के छात्र शिवकुमार की जगह लक्ष्मण तथा मोहम्मद अफजल की जगह गणेश परीक्षा दे रहा था। आदर्श उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सीतापुर बहरामपुर के छात्र सौरभ के स्थान पर प्रदीप कुमार और गुलाम वारिस की जगह नाबालिग सॉल्वर परीक्षा में बैठा था। वहीं ओपी यादव इंटर कॉलेज बिलंदा के छात्र आसिफ खान की जगह रवि परीक्षा दे रहा था।
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केंद्र व्यवस्थापक के अनुसार मोहम्मद अफजल को परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान आंतरिक सचल दल ने पकड़ा। अन्य को कक्ष निरीक्षकों ने परीक्षा देते समय दबोचा। पुलिस पूछताछ में साॅल्वरों ने स्वीकार किया कि उन्हें प्रति परीक्षा पांच हजार रुपये तय हुए थे। इसमें आधी रकम अग्रिम मिल चुकी थी।

प्रभारी निरीक्षक राजेंद्र सिंह ने बताया कि संबंधित तीन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों, पकड़े गए साॅल्वरों और गिरोह से जुड़े दो अन्य आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी साॅल्वरों को न्यायालय में पेश किया गया। यहां से सभी को जेल भेज दिया गया है। एक नाबालिग को जुवेनाइल कोर्ट भेजा गया है।



फतेहपुर। पंडित दीनदयाल राजकीय इंटर कॉलेज में पकड़े गए साॅल्वरों से जिले में सक्रिय बड़े नकल सिंडीकेट का खुलासा हुआ है। जिन छात्रों की जगह परीक्षा दी जा रही थी वे सभी जिले के निवासी बताए जा रहे हैं लेकिन अधिकांश बाहर रह रहे हैं। चर्चा है कि यह गिरोह खाड़ी देशों में रह रहे अभ्यर्थियों तक की ठेके पर परीक्षा कराता है। पंजीकरण से लेकर परीक्षा केंद्र तक पूरी व्यवस्था सिंडीकेट संभालता है। इसके वास्तविक छात्र को आने की जरूरत नहीं पड़ती।

पकड़े गए पांचों साॅल्वर खागा तहसील क्षेत्र के हैं। परिजन के अनुसार गणेश पेंटिंग का काम करता है जबकि अन्य भी पेंटिंग और मजदूरी से जुड़े हैं। जिन परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दी जा रही थी उनमें शिव कुमार, सौरभ, गुलाम वारिस, आसिफ खान और मोहम्मद अफजल के बाहर रहने की जानकारी सामने आई है। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।



जांच में एकारी के मनोज श्रीवास्तव और थरियांव के ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है। मनोज डॉ. मेवराम दिव्य ज्ञान इंटर कॉलेज मुंराव में शिक्षक हैं। ज्ञानेंद्र एक विद्यालय का संचालक बताया जाता है। आरोप है कि दोनों मिलकर वर्षों से छात्रों को पास कराने का ठेका लेते रहे हैं। कई छात्र विदेश या दूसरे राज्यों में नौकरी कर रहे हैं। वह भी 10 वीं-12वीं पास हो गए जबकि वे कभी स्कूल नहीं गए। एक छात्र को पास कराने के लिए 40 से 50 हजार रुपये तक वसूले जाने की चर्चा है।

सूत्रों के अनुसार थरियांव क्षेत्र का एक निषाद भी इस व्यवस्था में शामिल था जो विभिन्न विद्यालयों में प्रवेश दिलाकर असली परीक्षार्थियों की जगह साॅल्वर बैठवाता था। आदर्श हायर सेकेंडरी स्कूल सीतापुर बहरामपुर के बारे में भी सामने आया है कि वहां कागजों में नामांकन दिखाकर छात्रों को पास कराया जाता रहा। पूरे प्रकरण से शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और पुलिस अब नेटवर्क की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।



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परीक्षा केंद्र की शुचिता पर उठे गंभीर सवाल



- चार विषयों की परीक्षा में नहीं पकड़ सका सचल दल

संवाद न्यूज एजेंसी



फतेहपुर। पंडित दीनदयाल उपाध्याय इंटर कॉलेज में चल रही हाईस्कूल परीक्षा की शुचिता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। चार विषयों की परीक्षा में बाहरी छात्रों ने असली अभ्यर्थियों की जगह पेपर दिए लेकिन न केंद्र व्यवस्थापक और न ही सचल दल इस गड़बड़ी को पकड़ पाए। इस मामले ने परीक्षा व्यवस्था की निगरानी और शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शनिवार को परीक्षा के पांचवें दिन पांच साॅल्वर पकड़े जाने के बाद पूरे नकल नेटवर्क का खुलासा हुआ। इससे पहले भी कई परीक्षाओं में दूसरे अभ्यर्थियों ने पेपर दिए लेकिन जांच टीमों की नजर नहीं पड़ी। इस लापरवाही से शिक्षा विभाग की कार्यशैली की आलोचना तेज हो गई है।



मामले में अब पुलिस और शिक्षा विभाग दोनों जांच में जुटे हैं। संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। घटना से क्षेत्र के अभिभावकों और छात्रों में नाराजगी है और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग तेज हो गई है।
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