फतेहपुर। वन विभाग की लापरवाही से कछुआ तस्कर के भागने के मामले में रेंजर की ओर से सदर कोतवाली में 18 घंटे बाद प्राथमिकी दर्ज कराई गई। कोतवाली पुलिस ने तस्कर की तलाश के लिए दो टीमें गठित की हैं। पुलिस का कहना है कि वन विभाग ने घटना की सूचना काफी देर से दी। समय पर जानकारी मिलती तो तस्कर की तलाश पहले शुरू की जा सकती थी।
तीन फरवरी की दोपहर शहर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीम ने सुल्तानपुर जिले के उमेश कंजड़ और उसके नाबालिग साले को कछुआ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरपीएफ ने तस्कर और कछुओं को वन दरोगा सीमा यादव के सुपुर्द कर दिया था।
वन विभाग परिसर में ललौली महना गांव के चौकीदार जितेंद्र सिंह की निगरानी में उमेश को रखा गया था। बुधवार तड़के करीब पांच बजे सुरक्षा में तैनात चौकीदार को धक्का देकर आरोपी भाग निकला। रेंजर रूप सिंह की ओर से बुधवार रात 10:15 बजे उमेश के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।
घटना के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने में हुई देरी को लेकर वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोतवाल तारकेश्वर राय ने बताया कि आरोपी की तलाश के लिए टीमें बनाई गई हैं। वन विभाग से सूचना देर से मिलने के कारण कार्रवाई में विलंब हुआ।
एक चौकीदार के भरोसे छोड़े गए दो तस्कर, भूमिका पर उठे सवाल
कछुआ तस्कर के भागने के मामले में वन विभाग के अधिकारी और कर्मियों की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि दो तस्करों की निगरानी की जिम्मेदारी विभाग ने सिर्फ एक चौकीदार को सौंप दी थी। चौकीदार के भरोसे तस्करों को छोड़ना अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है। मामले को लेकर विभागीय स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है।
प्रकरण में डीएफओ जीडी मिश्रा ने बताया कि तस्करों की जिम्मेदारी वन क्षेत्राधिकारी रूप सिंह और उनकी टीम की थी। लापरवाही कहां हुई इसकी जांच के लिए मुख्यालय के क्षत्रपाल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी कर्मियों पर निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
सुल्तानपुर पुलिस के साथ वन विभाग की टीम तस्कर के घर पहुंची
जिले से वन विभाग कर्मियों की एक टीम सुल्तानपुर पहुंची है। टीम ने सुल्तानपुर जिले के हनुमानगंज थाने की पुलिस से संपर्क किया है। हनुमानगंज थाने की पुलिस के साथ वन विभाग की टीम उमेश कंजड़ के घर पहुंची। टीम ने उमेश के बारे में जानकारी जुटाई है। संभावित स्थानों पर धरपकड़ की तैयारी की है।
डीजीपी कार्यालय से हुई पूछताछ
वन विभाग परिसर से तस्कर के भागने के मामले में डीजीपी कार्यालय ने संज्ञान में लिया है। प्रकरण के बारे में डीजीपी कार्यालय से डीएफओ से पूछताछ की गई है।
तस्करों को लेकर घूमता रहा वन विभाग
वन विभाग आरपीएफ से तस्करों को सुपुर्दगी में लेने के बाद जीआरपी के पास पहुंचा। यहां तस्करों को सुपुर्दगी में लेने की बात कही। आरोप है कि जीआरपी ने मना कर दिया। इसके बाद कोतवाली पुलिस के पास लेकर पहुंची। कोतवाली पुलिस ने भी इन्कार कर दिया। जीआरपी और कोतवाली पुलिस के अनुसार मामला वन्य जीव का वन विभाग से जुड़ा है। इस हालत में वह सुपुर्दगी में नहीं ले सकते हैं।
फोटो-02-फरार कछुआ तस्कर उमेश कंजड़। स्रोत पुलिस