धनतेरस पर शहर में करीब साढ़े 15 करोड़ का व्यवसाय हुआ, जो पिछले साल से 30 प्रतिशत कम है। व्यापारियों का मानना है कि सूखा और ओलावृष्टि का असर धनतेरस के बाजार पर पड़ा। शहर के प्रमुख बाजार चौक में पिछले साल की तरह खरीददारों में उत्साह नहीं दिखा। लोग केवल जरूरी समान खरीदते दिखे।
बता दें कि पिछले साल धनतेरस पर शहर में करीब पांच करोड़ का बर्तनों का व्यवसाय हुआ था, लेकिन इस बार यह घटकर करीब साढ़े तीन करोड़ में सिमट गया। ज्वैलरी का व्यवसाय प्रभावित तो नहीं हुआ, लेकिन कोई बढ़ोतरी भी नहीं हुई। पिछले साल 15 करोड़ के सापेक्ष ही बिक्री हो पाई। इलेक्ट्रानिक सामग्री फ्रिज, एलसीडी, वाशिंग मशीन का व्यवसाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ। पिछले साल यह उपकरण करीब पांच करोड़ कीमत के बिके थे, लेकिन इस बार बिक्री तीन करोड़ के अंदर सिमट गई है।
किराना व्यवसाय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मिठाई की बिक्री कम हुई। बर्तन विक्रेता राधेश्याम हयारण, सराफा व्यवसाई हरिओम रस्तोगी, इलेक्ट्रानिक समान के विक्रेता अंजुम, किराना व्यवसाई लालजी गुप्ता, मिष्ठान विक्रेता संतोष गुप्ता का कहना है कि खरीफ की फसल में सूखा, रबी की फसल ओलावृष्टि से नष्ट होने के कारण धनतेरस पर्व फीका रहा। बिक्री किसान की आय पर निर्भर होती है। जब किसान के घर पैसा नहीं होता तो व्यवसाई भी कमजोर पड़ जाता है। उनका कहना है कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा 30 प्रतिशत व्यवसाय प्रभावित हुआ है।
खूब बिकी लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां
फतेहपुर। धनतेरस पर लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां खूब बिकी। शुक्रवार को सुबह से लेकर देर रात तक मूर्तियों की दुकानों में महिलाओं की भीड रही। 90 रुपये से लेकर 11 सौ रुपये कीमत तक मूतियों की बिक्री हुई। प्लास्टर आफ पेरिस से मिट्टी की मूतियों की कीमत डेढ़ गुना अधिक रही। लक्ष्मी गणेश के कपड़े 30 से लेकर 80 रुपये तक तथा माला पांच से लेकर 30 रु पये तक में बिके।