शहर से लेकर गांवाें तक बुखार के रोगियों की भरमार है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों मेें बुखार रोगियों की संख्या सबसे ज्यादा मिल रही है। सदर नगर पालिका के शादीपुर वार्ड सभासद मोहम्मद मारुफ को कई दिन से बुखार आ रहा था। रविवार को हालत बिगड़ने पर परिजन इलाज के लिए अस्पताल ले जा रहे थे।
अस्पताल पहुंचने से पहले उनकी मौत हो गई। शहर के मुराइनटोला निवासी राम सजीवन उर्फ बच्चा बाबू जिला पंचायत में लिपिक थे। वह कई दिन से बीमार चल रहे थे। उनका इलाज चल रहा था। रविवार को बच्चा बाबू की मौत हो गई।
खखरेरू प्रतिनिधि के मुताबिक आलमपुर गेरिया गांव खखरेरू सीएचसी के अंतर्गत आता है। सुवाराम (50) को 12 दिन से बुखार आ रहा था। शनिवार की रात हालत ज्यादा बिगड़ने पर परिजनों ने सुबह होने का इंतजार किया। रविवार को उनका इलाज कराने को इलाहाबाद ले जा रहे थे, रास्ते में सांसें जवाब दे गईं।
इसके अलाव सुवाराम की मौत भी बुखार से हो चुकी है। मौजूदा समय में गांव के राम भवन्र, कल्लू, अनिल कुमार, रोशन सिंह, शारदा, रोहित कुमार समेत कम से कम तीन दर्जन लोग बुखार से बीमार पड़े हैं।
ज्यादातर का प्राइवेट इलाज चल रहा है। जाहिर है कि गांव के लोगों का सरकारी इलाज से भरोसा उठा है। यही वजह है कि वह झोलाछाप के पास जाने को तैयार है लेकिन सीएचसी नहीं। सीएमओ डॉ. विनय कुमार पांडेय का कहना है कि जनता को सरकारी इलाज पर विश्वास करना होगा। जरा सी तकलीफ होने पर सरकारी चिकित्सक से परामर्श लेने के बाद ही दवाएं इस्तेमाल करें। जिन गांवों में बीमारों की संख्या सामने आ रही हैं वहां पर तत्काल स्वास्थ्य टीमें भेज कर वहां के हालात नियंत्रित करने के उपाय किए जा रहे हैं।