खागा/फतेहपुर। विधानसभा चुनावों के इतिहास में ऐसा छह बार के चुनावों में हुआ कि कोई प्रत्याशी विधायक बनते-बनते रह गया। वह भी चंद वोटों के अंतर से।
उस समय ऐसा जरूर लगा कि शायद कुछ और जोर लगाते तो आम आदमी से खास व्यक्ति होने का यह सफर शुरू हो जाता और उनका सियासी कद को एक मजबूत आधार मिल जाता।
आम विधानसभा चुनाव में पहली करारी शिकस्त 1951 में फतेहपुर उत्तरी सीट पर हुई थी। इसके बाद 1962 में खागा, बिंदकी और हसवा सीट पर हुई। 1969 में फतेहपुर, 1980 में खागा, 1985 में खागा, जहानाबाद, 2002 में किशनपुर, जहानाबाद सीट पर कांटे की टक्कर देखने को मिली थी।
1951 का विस चुनाव सीट फतेहपुर नार्थ
सोशलिस्ट पार्टी के प्रत्याशी अवध शरण उर्फ लल्ला ने कांग्रेस प्रत्याशी रहे विशाल सिंह को हराया था। इसमें अवध शरण को 12900 वोट मिले थे। जबकि विशाल सिंह को 11423 वोट प्राप्त हुए। हार का अंतर 1477 वोट का था।
1962 का विस चुनाव सीट खागा
जनसंघ पार्टी के प्रत्याशी रक्षपाल सिंह को 12913 वोट मिले थे और रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी चंद्रकिशोर को 11697 वोट मिले थे। हार का अंतर 1216 वोट का था।
1962 का विस चुनाव सीट बिंदकी
कांग्रेस प्रत्याशी जगन्नाथ सिंह को 9800 वोट प्राप्त हुए और निर्दलीय प्रत्याशी पन्नालाल को 9569 वोट मिले। हार का अंतर 231 वोट का था।
1962 का विस चुनाव सीट हसवा
निर्दलीय प्रत्याशी रघुवीर सहाय को 12369 वोट मिले थे। यहां कांग्रेस प्रत्याशी जागेश्वर को 11047 वोट। 1322 वोट के अंतर से कांग्रेस प्रत्याशी को हार मिली।
1969 का विस चुनाव सीट फतेहपुर
भारतीय जनसंघ प्रत्याशी उमाकांत वाजपेई को 15237 वोट प्राप्त हुए। जबकि भारतीय क्रांति दल के प्रत्याशी बृजलाल वर्मा को 14822 वोट मिले। हार का अंतर 415 वोट का था।
1980 का विस चुनाव सीट खागा
कांग्रेस प्रत्याशी कृष्ण दत्त को 22441 वोट मिले थे जबकि जनता पार्टी के प्रत्याशी लक्ष्येंद्र नाथ को 22148 वोट मिले थे। 293 वोट से कृष्णदत्त ने विधायक का चुनाव जीता था।
1985 का विस चुनाव सीट खागा
1980 के चुनाव की तरह इस चुनाव में भी कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णदत्त ने लोकदल प्रत्याशी लक्ष्येंद्रनाथ को हराया था। कृष्णदत्त को 25664 वोट मिले। लक्ष्येंद्र नाथ को 24337 वोट मिले। 1327 वोट से यह हार लक्ष्येंद्र को मिली थी।
1985 का विस चुनाव सीट जहानाबाद
कांग्रेस प्रत्याशी प्रकाश नारायण को 31619 वोट मिले थे। लोकदल प्रत्याशी नरेश कुमार उत्तम को 31496 वोट। नरेश कुमार उत्तम यह चुनाव 123 वोट से हार गए थे।
2002 का विस चुनाव सीट किशनपुर
बीजेपी प्रत्याशी कृष्णा पासवान को 27274 वोट मिले थे, जबकि बसपा प्रत्याशी मुरलीधर को 26488 वोट प्राप्त हुए। हार का अंतर 786 वोट का था।
2002 का विस चुनाव सीट जहानाबाद
सपा प्रत्याशी मदन गोपाल वर्मा को 27936 वोट प्राप्त हुए थे। जबकि लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी सैयद कासिम हसन को 27462 वोट मिले थे। कासिम हसन 474 वोट से यह चुनाव हार गए थे।
जहानाबाद में सबसे कांटे की टक्कर
आंकड़ों पर गौर करें तो इन चुनावों में अब तक सबसे नजदीकी और कांटे की टक्कर जहानाबाद सीट पर देखने को मिली है। यहां पर 1985 के चुनाव में कांग्रेस के प्रकाश नारायण ने लोकदल के नरेश कुमार उत्तम को 123 वोट से हराया था। नरेश उत्तम मौजूद समय सपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं।