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कालाबाजारी: 267 रुपये की यूरिया, 320 रुपये में खरीद रहे किसान

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असोथर सहकारी समिति में खाद न होने से पसरा सन्नाटा। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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फतेहपुर। जरूरत के समय साधन सहकारी समितियों में यूरिया नहीं है। इसका फायदा निजी दुकानदार उठा रहे हैं। 267 रुपये वाली यूरिया को 320 रुपये में बेचा जा रहा है। फसलों में अच्छी पैदावार के लिए किसान अधिक दाम पर खाद खरीदने को मजबूर है। जबकि पीसीएफ और निजी उर्वरक गोदाम में यूरिया का स्टाक डंप है।
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डीएपी के बाद अब यूरिया की किल्लत शुरू हो गई है। आलू, गेहूं की बुवाई के समय किसानों को डीएपी नहीं मिल रही थी। 1200 रुपये वाली डीएपी को किसानों ने 1400 रुपये में खरीद कर फसल की बुवाई की थी।
अब फसलों में यूरिया डालने का समय है। ऐसे में किसानों को अब यूरिया नहीं मिल रही है। साधन सहकारी समितियों के गोदाम में यूरिया न होने के कारण ताला बंद रहता है।
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इस समय किसानों को आलू, गेहूं की फसल में यूरिया का छिड़काव करना है। समय पर खाद का छिड़काव न होने से पैदावार कमजोर हो जाएगी। इसके लिए किसान अधिक दाम में यूरिया खरीदने के लिए मजबूर हैं।
बेसड़ी गांव के किसान सचिन ने बताया कि साधन सहकारी समिति में यूरिया नहीं है। ताला बंद रहता है। इसलिए प्राइवेट दुकान से यूरिया खरीद कर छिड़काव किया हैं। जरूरत के समय साधन सहकारी समिति में खाद नहीं मिलती है।
बेसड़ी गांव के भानू यादव ने कहा कि 320 रुपये की एक बोरी यूरिया खरीद कर गेहूं की फसल में छिड़काव किए हैं। प्राइवेट दुकानदार मनमानी रेट में यूरिया बेच रहे हैं। इन पर अधिकारी भी अंकुश नहीं लगा पा रहे हैं।
सुसवन गांव के शेरा ने कहा कि गेहूं की बुवाई करने के 20 से 25 दिन में यूरिया का पहला छिड़काव करना चाहिए। गेहूं की फसल एक महीने की हो गई है। समिति में यूरिया आने का इंतजार कर रहे हैं। निजी दुकानों में यूरिया बहुत महंगी है।
असोथर कस्बा के शंभू गुप्ता ने कहा कि जब साधन सहकारी समिति में यूरिया नहीं मिली तो प्राइवेट दुकान से खरीद कर छिड़काव किया हैं। इसी तरह फसल बुवाई के समय डीएपी भी प्राइवेट दुकान से महंगे दाम में खरीदनी पड़ी थी।
रबी फसल में यूरिया का आवंटन व मिला स्टाक
रबी में यूरिया का आवंटन - 71 हजार टन
अब जिले को आई यूरिया - 26500 टन
प्राइवेट गोदाम में यूरिया - 57 हजार टन
पीसीएफ गोदाम में यूरिया - एक हजार टन
जिले में यूरिया का स्टाक पर्याप्त है। साधन सहकारी समितियों में धान खरीद के कारण सचिव यूरिया बिक्री में ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्राइवेट दुकानदारों को निर्देश दिया गया है कि वह तय रेट पर ही यूरिया बेचे। यदि कोई दुकानदार अधिक रेट में यूरिया बेच रहा है, तो उसकी शिकायत किसान दर्ज कराएं, कार्रवाई की जाएगी। - बृजेश सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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