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गजब व्यवस्था: सुरक्षित सीट पर चुने जाते थे दो विधायक

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भूतपूर्व विधायक सुखरानी देवी। संवाद - फोटो : FATEHPUR
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खागा। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में दो चुनाव ऐसे थे, जिसके बारे में सुनकर आप हैरान जरूर होंगे। यूपी में जिन सीटों को सुरक्षित किया जाता था, वहां पार्टी अनुसूचित जाति का प्रत्याशी तो उतारती ही थी, इसके साथ ही वहां पर एक सामान्य प्रत्याशी भी उतारा जाता था।
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दो प्रत्याशियों को उतारने का फैसला पार्टियों का होता था। यह अनिवार्य नहीं किया गया था। इस तरह से आरक्षित विधानसभा में दो विधायक की सीट निकलती देखी गई थी। यह व्यवस्था बेहद ही परेशान करने वाली थी और ऐसे में यह व्यवस्था 1957 के चुनाव के बाद समाप्त कर दी गई।
ऐसा माना जाता है कि यह व्यवस्था आजादी के बाद शुरू हुई थी। उसका कारण सामाजिक व्यवस्था रही होंगी। जबकि गैर आरक्षित सीटों पर कोई भी चुनाव लड़ सकता था। अब अगर 1951 के चुनाव पर गौर करें तो जनपद फतेहपुर को पहले चुनाव में सात और 1957 के चुनाव में छह विधायक मिले थे।
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1951 का विधानसभा चुनाव
168 फतेहपुर साउथ कम खागा साउथ (वर्तमान में किशनपुर) सुरक्षित सीट थी। यहां पर विधायक की दो सीटें थी। यहां से 1951 में कांग्रेस के टिकट पर दो लोग चुनाव लड़े थे। इसमें अनंत स्वरूप सिंह सामान्य वर्ग से और भगवान दीन अनुसूचित जाति वर्ग से शामिल थे। चुनाव के बाद अनंत स्वरूप और भगवान दीन दोनों विजयी हुए थे और विधायक चुने गए। इसके अलावा यहां पर सोशलिस्ट पार्टी की ओर से रामरतन और हरिश्चंद्र ने चुनाव लड़ा। किसान मजदूर प्रजा पार्टी के टिकट से मैकू और बाबू लाल भी चुनाव लड़े थे।
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1951 में फतेहपुर से चुने गए कुल विधायक
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161 खजुहा पश्चिम से गुरू प्रसाद कांग्रेस से 12566 वोट
162 खजुहा पूर्व से शिवराज बलि सिंह कांग्रेस,11174 वोट
163 खागा उत्तरी से खान अब्दुल रऊफ कांग्रेस, 7155 वोट
164 खागा दक्षिणी सुरक्षित सीट से दो विधायक चुने गए
कांग्रेस के अनंत स्वरूप सिंह व भगवान दीन, उन्हें क्रमश: 18339 व 13891 वोट प्राप्त हुए थे।
- 204 फतेहपुर नार्थ से सोशलिस्ट पार्टी के अवध नारायण लल्ला, 12900 वोट
- 206 फतेहपुर साउथ से भगवती प्रसाद शुक्ला कांग्रेस, 12444 वोट
1957 का विधानसभा चुनाव
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जनपद में 1957 के चुनाव में दो प्रत्याशियों का प्रदर्शन फतेहपुर और किशनपुर सीट पर देखने को मिला था। फतेहपुर और किशनपुर दोनों अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें थी। यहां पर कांग्रेस के साथ ही दूसरी पार्टियों ने अपने दो-दो प्रत्याशी उतारे थे। फतेहपुर से कांग्रेस के शिवराज बलि सिंह और सुखरानी देवी विधायक चुनी गई थी। इस क्रम में किशनपुर में रघुनाथ सहाय और अनुसूचित जाति से जागेश्वर चुनाव जीते थे। जागेश्वर स्वास्थ्य मंत्री भी रहे। इस चुनाव में कुल छह विधायक चुने गए थे। कांग्रेस के अलावा प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने किशनपुर सुरक्षित सीट पर दो प्रत्याशी उतारे थे। इसमें सवर्ण वर्ग से बाबूलाल और अनुसूचित जाति से गजोधर प्रसाद थे।
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1957 में फतेहपुर जनपद से चुने गए विधायक
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166 फतेहपुर (सुरक्षित) से कांग्रेस के शिवराज बलि सिंह 21559 वोट और अनुसूचित जाति से सुखरानी देवी 18272 वोट विधायक बनी थी।
167 खजुहा से कांग्रेस के रघुवीर सहाय 12102 वोट, विधायक चुने गए थे।
168 किशनपुर सुरक्षित सीट से कांग्रेस के अनुसूचित जाति के प्रत्याशी जागेश्वर 25398 वोट और सामान्य रघुनाथ सहाय 25191 वोट पाकर विधायक बने थे।
169 खागा से कांग्रेस प्रत्याशी वासुदेव 16588 वोट पाकर विधायक चुने गए थे।
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पहली महिला प्रत्याशी व विधायक थीं सुखरानी देवी
1957 के चुनाव में पहली बार किसी महिला प्रत्याशी को किसी पार्टी से टिकट मिला था। 166 फतेहपुर सुरक्षित सीट से महिला प्रत्याशी सुखरानी देवी पहली महिला प्रत्याशी थी। वह चुनाव जीतकर विधायक भी चुनी गई थी। इस तरह जनपद की पहली महिला विधायक सुखरानी देवी थी। इसके बाद 2002 में खागा से कृष्णा पासवान विधायक चुनी गई और वह वर्तमान खागा विधायक भी हैं।
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