फतेहपुर। नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को पॉक्सो विशेष अदालत ने 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला असोथर थानाक्षेत्र के एक गांव का है। जहां 45 वर्ष के व्यक्ति ने गांव की ही तेरह वर्ष की बालिका के साथ दुष्कर्म किया था। शुक्रवार को अदालत ने सभी पक्षों को सुनते हुए अपना फैसला सुनाया।
घटना 18 मार्च 2015 की दोपहर घटित हुई। प्रकरण की वादिनी यानी कि पीड़िता की मां ने बताया था कि वह किसी काम से थरियांव गई हुई थी। घर में उसकी तेरह वर्ष की बेटी अकेली थी।
इस दौरान गांव का शंकर (45) उसके घर पहुंचा और बेटी से खेत में आलू बिनने चलने के लिए बोला। बच्ची को बहलाकर शंकर उसे गांव के ही एक अन्य व्यक्ति के अरहर के खेत ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म का प्रयास किया।
बच्ची की चीख सुनकर लोग आने लगे तो शंकर उसे किसी से कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी देता हुआ चला गया। मां घर लौटी तो बच्ची ने आपबीती बताई।
मां की तहरीर पर पुलिस ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बाल यौन शोषण अधिनियम पॉक्सो के तहत केस दर्ज किया था। यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो की कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था।
विशेष अभियोजक देवेश श्रीवास्तव और सहायक शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र भदौरिया ने अदालत में अपना पक्ष रखा। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश अभिनव द्विवेदी ने आरोपी को दोषी मानते हुए 10 साल सश्रम कारावास और बीस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड का भुगतान न करने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।