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क्रय केंद्रों में गेहूं किसानों का 19 करोड़ फंसा

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फतेहपुर। गेहूं खरीद के लिए इस बार शासन से लक्ष्य तो नहीं मिला, लेकिन पिछले साल की तुलना में दो हजार मीट्रिक टन गेहूं की अधिक खरीद अब तक हो चुकी है। जिन किसानों ने गेहूं बेचा है वह भुगतान के लिए भटक रहे हैं।
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क्रय एजेंसियों पर गेहूं बेचने वाले करीब चार हजार किसानों का 19 करोड़ 54 हजार रुपये का भुगतान बाकी है। भुगतान में हीलाहवाली करने पर शासन ने यूपीएसएस एजेंसी के केंद्रों को गेहूं खरीदने से रोक दिया है।
जिले में पांच क्रय एजेंसियों के 59 क्रय केंद्रों में गेहूं की खरीद हो रही है। हाटशाखा को छोड़ कर बाकी चार एजेंसियों ने किसानों को पूरा भुगतान नहीं किया है। पीसीएफ और यूपीएसएस पर सबसे ज्यादा बकाया है। पीसीएफ पर किसानों का 13 करोड़ 50 लाख 39 हजार रुपये बकाया है। वहीं यूपीएसएस पर एक करोड़ 53 लाख 95 हजार रुपये का भुगतान लंबित है। इसके अलावा मंडी समिति पर 54 लाख 12 हजार रुपये और भारतीय खाद्य निगम पर 33 लाख 16 हजार रुपये का लंबित हैं।
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खरीद में आनाकानी और भुगतान में देरी के कारण किसान आढ़तियों के यहां गेहूं बेचने को मजबूर हैं। प्रशासन ने लंबित भुगतान को देखते हुए यूपीएसएस एजेंसी के क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद रोक दी है। इस समय सिर्फ हाटशाखा और पीसीएफ के केंद्रों पर ही गेहूं की खरीद चल रही है।
पिछले साल से तुलना करें तो इस समय तक 33 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई थी। जबकि इस बार 7657 किसानों का 34900 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा जा चुका है। लेकिन अभी तक किसानों का भुगतान न होना बड़ी समस्या बना हुआ है।
भुगतान में कहां से आ रही बाधा
अधिकारियों की मानें तो भुगतान में पीएफएमएस यानी पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम में किसान का नाम मिसमैच होने से परेशानी आ रही है। जिन किसानों के नाम, उनकी खतौनी, आधार कार्ड व बैंक पासबुक में एक समान नहीं होता है। उनके भुगतान में देरी हो रही है। ऐसे किसानों का दोबारा कागज सही कराकर भेजा जाता है।
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