असोथर। बिचौलियों के घर अनाज से भरी सरकारी बोरियां मिलने से प्रशासनिक गलियारे में उथल-पुथल मची है। जिला विपणन अधिकारी रमेश श्रीवास्तव की ओर से तीन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन हाट शाखा असोथर के विपणन निरीक्षक (केंद्र प्रभारी) को मुकदमे से बाहर रखा गया था। विवेचक द्वारा अब विपणन निरीक्षक का नाम भी मुकदमे में शामिल किया गया है। सभी चार आरोपियों को नोटिस देकर पूछताछ के लिए के लिए बुलाया गया है।
सदर एसडीएम प्रमोद झा ने मंगलवार रात करीब साढ़े 10 बजे असोथर कस्बा निवासी अनुज कुमार सिंह के घर तलाशी कराई। अनुज सिंह के घर से उन्हें 580 सरकारी बोरियों में गेहूं सील किया हुआ मिला। इन बोरियों को कब्जे में लिया गया। इसी तरह से एक ट्रक में 310 बोरी गेहूं भरा मिला। जबकि मौके से ढाई हजार सरकारी बोरियां व एक हजार क्विंटल गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा मिला। जांच में पाया गया कि हाट शाखा क्रय केंद्र असोथर द्वारा मिलीभगत कर यह कार्य कराया जा रहा था।
जिला विपणन अधिकारी रमेश श्रीवास्तव द्वारा असोथर निवासी नीरज सिंह, शिवबदन सिंह व अनुज कुमार सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। इस मामले में विपणन निरीक्षक (केंद्र प्रभारी) वंदना सिंह को मुकदमे से दूर रखा गया था।
इसकी खबर अमर उजाला ने प्रकाशित की थी। हालांकि एसडीएम द्वारा जिलाधिकारी को विपणन निरीक्षक के खिलाफ रिपोर्ट दी गई थी। इस मामले में शुक्रवार को मुकदमे के विवेचक प्रभुनाथ यादव द्वारा विपणन निरीक्षक का नाम प्रकाश में लाते हुए नामजद किया गया है। इंस्पेक्टर असोथर नागेंद्र नागर ने बताया कि विपणन निरीक्षक का नाम मुकदमे में बढ़ाया गया है। सभी चार आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर दी गई है।
केवल धोखाधड़ी की धाराओं में रिपोर्ट
बेहद गंभीर मामले में जिला विपणन अधिकारी द्वारा तीन लोगों के खिलाफ केवल धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कराया गया था। जबकि ऐसे प्रकरण में आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा का भी प्रयोग होता है। इस धारा का प्रयोग नहीं किया जाना भी चर्चा का विषय बना है।