फतेहपुर। जिला अस्पताल में आपरेशन के लिए पैसा मांगने को लेकर 26 फरवरी हुए बवाल का मामला डीएम की चौखट तक पहुंच गया है। सोमवार को जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने चेयरमैन प्रतिनिधि पर बड़ी तादाद में समर्थकों को साथ लाकर गाली गलौच और मारपीट करने का आरोप लगाया है। कहा कि कार्रवाई न होने पर चिकित्सकों में भय का माहौल है। ऐसी दशा में काम करना संभव नहीं है।
डीएम अपूर्वा दुबे से मुुलाकात करने कलक्ट्रेट पहुंचे सदर अस्पताल के चिकित्सकों ने नगर पालिका की चेयरमैन प्रतिनिधि हाजी रजा की कार्यशैली पर सवाल उठाए। बताया कि जिस वक्त यह घटना हुई ओटी में दो चिकित्सक मौजूद थे। हाजी रजा ने एक कर्मचारी को कई झापड़ मारे और एक चिकित्सक से अपशब्दों का प्रयोग किया।
यहां तक कि सीएमएस आफिस में भी उनके साथ गलत तरीके से पेश आया गया। डीएम ने प्रतिनिधि मंडल को निर्भीक होकर काम करने का भरोसा दिया है। प्रतिनिधि मंडल में डॉ. एनके सक्सेना, डॉ. केपी सिंह, डॉ. पीके निरंजन, डॉ. सुरेश सचान और डॉ. जीपी शर्मा आदि मौजूद रहे।
जांच का समय पूरा, कमेटी ने नहीं दी रिपोर्ट
जिला अस्पताल में आपरेशन के नाम पर पैसा मांगने के मामले में चल रही जांच का वक्त खत्म हो गया लेकिन जांच कमेटी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। रिपोर्ट अभी सीएमएस को नहीं दी गई है। उधर, सीएमएस का कहना है कि सर्जन पर पैसा लेने के बजाय पैसा मांगने का आरोप है। इस पर कौन सा चार्ज बनता है इस पर विचार विमर्श चल रहा है।
26 फरवरी को जिला अस्पताल की ओटी में चेयरमैन प्रतिनिधि हाजी रजा अपने समर्थकों के साथ उगाही के दो प्रकरण लेकर पहुंचे थे। उन्होंने पैसा न मिलने पर एक आपरेशन को टाले जाने का आरोप लगाया था। इस प्रकरण में सीएमएस डॉ. प्रभाकर ने दो चिकित्सकों की जांच कमेटी गठित करके सोमवार तक जांच सौंपने का वक्त दिया था। तय वक्त पूरा हो गया लेकिन जांच रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी।
सीएमएस का कहना है कि सर्जन पर पैैसे मांगने का आरोप है ना कि लेने का। ऐसे में पैसा मांगने पर क्या चार्ज लगता है, इसे जानना जरूरी हो गया है। इसी पर मंथन चल रहा है। अभी जांच कमेटी ने भी रिपोर्ट नहीं दी है। रिपोर्ट मिलने पर ही इस प्रकरण पर कुछ और कहना संभव है।