फतेहपुर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लोकतंत्र की चमक बिखरती नजर आई। मतदाता नाव से नदी पार करके वोट डालने बूथों पर पहुंचे। कई लोगों ने पैदल और कई ने बाइक से नदी पार की।
देवमई ब्लाक के बेरीनारी गांव के मतदाताओं ने मतदान करने के लिए पहले नाव से पांडु नदी पार की और फिर दो किमी पैदल चलकर मतदान केंद्र पहुंच सके। बेरीनारी गांव पांडु नदी के दूसरी छोर पर है, यह गलाथा ग्राम पंचायत का मजरा है।
इस गांव में सरकारी भवन न होने के कारण पोलिंग बूथ नहीं बनाया जाता है। इसलिए यहां के वोटरों के लिए गलाथा ग्राम में ही पोलिंग बूथ बनाया जाता है। सड़क मार्ग से गलाथा गांव की दूरी करीब 15 किमी है और वहां जाने के लिए कानपुर सीमा को पार करना पड़ता है। यहां के मतदाताओं को हर चुनाव में मतदान करने के लिए गलाथा गांव जाना मजबूरी है। किसी वाहन से मतदाताओं को छिवली गांव होकर हाईवे से कानपुर सिकठिया व डोमनपुर होकर गलाथा पहुंचना पड़ता है।
वहीं दूसरी ओर गांव किनारे बहने वाली पांडु नदी को नाव से पार करने के बाद दो किमी पैदल कच्चे रास्ते से बूथ तक पहुंचना होता है। पंचायत चुनाव में मतदान के लिए गांव के विनोद कुमार अपनी पत्नी रूप देवी के अलावा रमेश, रामलाल निषाद व रामजानकी के साथ मतदान करने के लिए घर से निकले। यह लोग नाव से नदी पार करने के बाद दो किमी पैदल चलकर बूथ तक पहुंचे।
वह अकेले ही नहीं यहां करीब 375 मतदाता हैं, जिन्हें इसी तरह वोट डालने जाना पड़ता है। मतदाताओं ने कहा कि चुनाव में यदि गांव में ही बूथ बन जाता तो अच्छा रहता। इस वजह से बहुत लोग मतदान करने बूथ तक नहीं पहुंच पाते हैं। अभी तक किसी ने इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दिया है।