कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन करते कोर्राकनक गांव के किसान
- फोटो : अमर उजाला
किसान उदयभान सिंह ने बताया कि यमुना-केन नदी के केंद्र ललौली से दतौली पुल तक बाढ़ के समय कटान अधिक होता है। अब तक सैकड़ों किसानों की करीब 20 हजार बीघा खेत यमुना में समाहित हो गए हैं। जिससे बांदा जिले में क्षेत्रफल बढ़ गया है। तटवर्ती क्षेत्र के भूमिधर किसान भूमिहीन हो गए हैं।
बार्डर की पैमाइश कराकर जिले की सीमा चिह्नित कराई जाए। बांदा के जाने वाले खेतों को सीमांकन कराकर वापस दिलाया जाए। कोर्राकनक गांव से आठ किमी दूरी पर यमुना नदी रही है। वर्ष 1978 की बाढ़ और उसमें हुई कटान से यमुना नदी की धारा गांव के पास आ गई है।
हर साल की बाढ़ से कोर्राकनक गांव के कई मजरे बाढ़ से प्रभावित होते हैं। बारिश के समय ग्रामीणों को गांव छोड़ना पड़ता है। इस दौरान लवकुश सिंह, बीरेंद्र सिंह, राय सिंह, मेड़िया, शिवमोहन सिंह, शिवभूषण सिंह, बलबीर सिंह, रणधीर सिंह, बसंत सिंह, आनंदपाल सिंह, बृषभान सिंह, बबलू सिंह, राजा भइया, राजू सिंह, रामप्रताप सिंह, जयपाल सिंह, चंदभान सिंह, रविकांत सिंह, वीरेंद्र प्रसाद मौजूद रहे।