बेघरों के लिए बनीं सरकारी कालोनियों में किराएदारों
का बसेरा है। कांशीराम कालोनी के 40 फीसदी से ज्यादा आवंटियों ने अपने नाम
के फ्लैट किराए पर उठा रखे हैं। किराएदारों की बढ़ती तादाद से कालोनी मेें
रहने वाले अन्य आवंटियों को तरह-तरह की दुश्वारियों से जूझना पड़ रहा है।
उधर प्रशासन स्तर से कई मर्तबा नोटिसें जारी करने के बावजूद वह सरकारी
कालोनियों को किरायेदारों से आजाद कराने में अभी तक नाकामयाब रहा है।
माया
सरकार में शहर के 1500 गरीब परिवारों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए
कांशीराम शहरी आवास योजना लांच हुई थी। भूमि की कमी के चलते यह संख्या घटकर
1284 हो गई।
आवंटन प्रक्रिया में तमाम गैरबीपीएल श्रेणी के लोगों के शामिल
हो जाने से इन कालोनियों की उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए। मौजूदा तस्वीर
पर गौर करें तो शहर के महर्षि विद्या मंदिर, अस्ती व गड़रियनपुरवा में
स्थित काशीराम कालोनियों में आवंटियों के बराबर किराएदारों ने अपना बसेरा
बना रखा है।
महर्षि विद्या मंदिर के पास बनीं काशीराम कालोनी फेस वन
में रहने वाले अशोक कुमार कहते हैं कि कालोनियों में रहने वाले कई
किराएदारों की गतिविधियां संदिग्ध हैं। ऐसे मेें इनके रहने से ऐसी वैसी बात
होने का डर बना रहता है।
गड़रियनपुरवा में स्थित कालोनी की आवंटी आसमा
बेगम कहती है कि पड़ोस के फ्लैट में रहने वाले किराएदार के साथ रात मेें भी
लोगों के आने जाने का सिलसिला बना रहता है।
उधर एसडीएम विवेक श्रीवास्तव
ने बताया कि समय समय पर कालोनियां चेक की जाती हैं। जिन फ्लैट में किराएदार
के रहने की जानकारी मिलती हैं, उन्हें खाली कराया जाने के लिए आवंटी को
निर्देशित किया जाता है।