चौक में कपड़े की दुकान पर खरीददारी करती मुस्लिम महिलाएं।
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रमजान मुबारक में ईद की नजदीकियाें का अहसास बाजार कराने लगे हैं। मुस्लिम समाज ईद की खुशियों में चार चांद लगाने को तैयार हो रहा है। बाजारों में खरीददारों की संख्या लगातार बढ़ने से दुकानदारों को फुर्सत नहीं मिल रही है। दुकान खुलने से लेकर बंद होने तक बाजारों में खरीददार नजर आ रहे हैं।
मुस्लिम समाज के इस त्यौहार की रौनक लगातार बढ़ती जा रही है। सहरी और इफ्तार में प्रयोग किए जाने वाले खानपान की वस्तुओं की खरीददारी के साथ ईद मनाने की भी तैयारियां चालू हो गई हैं। बाजार इसके गवाह बन रहे हैं। क्या मुस्लिम बाजार और क्या दूसरी। हर जगह टोपी लगाए मर्द और बुर्का पहने औरतें नजर आ रही हैं। सबसे ज्यादा भीड़ कपड़ों की दुकानों पर दिखाई दे रही हैं। समय कम होने से कपड़ा सिलवाने की बजाय लोगों का रुझान रेडीमेड खरीद कर ईद की इबादत करना है।
बच्चे और महिलाओं की भीड़ पहले से ही रेडीमेड गारमेंट्स में जुट रही है। चूड़ी और कंगन की दुकानों पर महिलाओं का मजमा लग रहा है। नारी प्रसाधन की दुकानें महिलाओं की आमद से गुलजार हैं। हालात यह है कि भीड़ बढ़ने से दुकानदारों ने घर के अन्य सदस्यों को सहयोग देने के लिए काम पर लगा रखा है। दर्जियों की दुकान पर रखी सिलाई मशीनें देर रात तक दम नहीं ले पा रही हैं। फुटवियर की भी खूब खरीददारी हो रही है।
उधर, मस्जिदों में नमाज और तरावीह का दौर जारी है। इमाम, अकीदतमंदों को नेकी की राह चलने की नसीहत दे रहे हैं। रोजेदार दुनियादारी से दूर रहकर बस अल्लाह को पुकार रहे हैं। शिया समुदाय के अगुवाकार यावर मेंहदी कहते हैें कि यह महीना इबादत का है। रोजेदार अल्लाह के बताए रास्तों पर चलकर नेकी बटोर रहे हैं। वहीं सुन्नी समुदाय के काजी शहर कारी फरीदुद्दीन कादरी कहते हैं कि रोजेदार पूरे मन से रोजा रखें। इबादत में मन लगाएं और गुनाह और हर चीज से तौबा करें।