जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की लगी भीड़। संवाद
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फतेहपुर। सरकारी अस्पताल में बाहर से दवा लिखने का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। जिला अस्पताल में कुछ डॉक्टर मरीजों को एक अलग पर्चे पर पांच से छह दवाएं लिख रहे हैं, जिसमें महज एक-दो दवा ही जिला अस्पताल में मौजूद होती है। बाकी दवाओं के लिए मरीजों को मेडिकल स्टोर जाना पड़ता है।
इन दवाओं को लेने में एक मरीज को कम से कम 500 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं। इसी तरह सभी प्रकार की जांच की सुविधा न होने से कुछ जांचों की संख्या बढ़ा दी जा रही है। बाहर से जांच कराने में लोगों को मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में 16 अप्रैल को केंद्रीय राज्यमंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने बाहर से लाई गईं दवाइयां पकड़ी थीं और चिकित्सकों को फटकार लगाई थी। उसके बाद भी चिकित्सकों की कार्यशैली पर सुधार नहीं हुआ। जिला अस्पताल में हर रोज औसतन एक हजार मरीजों का आना होता है।
दूरदराज से आए मरीजों को पहले पर्चा बनवाने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। घंटों इंतजार करने के बाद उन्हें एक रुपये वाला पर्चा मिलता है। यहां से डॉक्टर के पास पहुंचने पर महज चंद मिनटों में कई तरह की दवाएं लिख दी जाती हैं।
अधिकांश मरीजों की पर्ची पर दवाओं की संख्या पांच से अधिक होती है। साथ ही जिन दवाओं को पर्ची पर लिखा जाता है, उनकी अलग से एक पर्ची बना कर दी जाती है। यहीं से खेल की शुरुआत होती है। जब छोटी पर्ची लेकर मरीज अस्पताल के दवा घर पर पहुंचता है तो काउंटर से दो दवाओं को देने के बाद सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
सीएमएस आरएम गुप्ता ने बताया कि जिन चिकित्सकों ने बाहर की दवाएं लिखी हैं, उनकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जिला अस्पताल में सभी बीमारियों के लिए दवाएं उपलब्ध हैं।