जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1959 में संशोधन को लेकर गुरुवार को एक दिवसीय कार्यशाला हुई। कार्यशाला में जोर दिया गया कि संस्थागत केंद्रों में होने वाली मौतों में बीमारी, चोट या उलझन आदि का जिक्र करते हुए अन्य कारणों का भी स्पष्ट खुलासा किया जाए।
सीएमओ सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1959 पर चर्चा हुई। सीएमओ/ अपर जिला रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु डा.ॅ विनय कुमार पांडेय ने कहा कि सरकारी व गैरसरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म एवं मृत्यु की घटना को आईसीडी-10 में कोड के आधार पर सूचीबद्ध किया जाएगा।
एसीएमओ डॉ एलआर सचान ने बताया कि संस्थागत केेंद्राें में मृत्यु के कारणों में बीमारी, चोट या उलझन आदि से होने के वजहें अंकित की जाए ना कि मरने का कारण।
कहा कि यदि मरने वाले को पुरानी बीमारी रही है तो उसका भी उल्लेख किया जाए। मृत्यु के लिए अन्य कोई कारण सामने आए तो उसका भी खुलासा किया जाए। एसीएमओ डॉ एके सिंह ने जन्म एवं मृत्यु से संबंधित दी जाने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी देने के साथ कहा कि आजादी के बाद से देश में इन आंकड़ों में काफी वृद्धि हुई है। इस मौके पर प्रशिक्षक डॉ लोकराम सचान, सहायक शोध अधिकारी मिस्बाहुल हक, डॉ एसपी जौहरी, पीयूष मिश्रा, डॉ निधि सिंह, डॉ दीपिका, डॉ वसुंधा सिंह, डॉ मोनिका, डॉ शक्तिबाला, डॉ राजन, डॉ संजय मुख्य रूप से मौजूद रहे।