भागवत कथा में आचार्य विद्या सागर शुक्ल ने रासलीला का मनोहर चित्र प्रस्तुत करते हुए बताया कि जन्म जन्मांतर का भटका हुआ जीव परमात्मा से मिलना चाहता है, लेकिन वह उसे ढूंढ नहीं पा रहा है। हमें परमात्मा को अपने अंतर्मन में खोजना होगा।
अशोक नगर में चल रही भागवत कथा में श्री शुक्ल ने बताया कि परमात्मा तो जीव मात्र के ह्रदय में बैठा है। यही मिलन तो रास है और परम आनंद प्रदान करता है। अभिमानी कंस ने भगवान को शत्रु मान लिया और शत्रु भाव से ही चिंतन करता रहा, फिर भी भगवान से मिलने के लिए अक्रूर जैसे धर्मात्मा का सहारा लेना पड़ा।
आचार्य ने कहा कि धर्म से ही अहंकार का विनाश संभव है। आज समाज में तमाम वृत्तियां बढ़ रही है, इन्हें समूल नष्ट करने के लिए धर्म मंच की स्थापना करनी होगी। भागवत कथा से अभिमान नष्ट होता है और भगवान की कृपा मिलती है। इस दौरान पुत्तन बाजपेयी, भोला मिश्र, पप्पू अग्निहोत्री, पप्पी सिंह, काली चरण, बद्री गुप्ता आदि रहे।
वहीं शहर के हाइड्रिल कालोनी में श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए हरि नारायण जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन में काम एक आवश्यकता है। इस पर सृष्टि की निरंतरता निर्भर है, लेकिन यह संयमित होना चाहिए। कथा श्रवण के साथ व्यक्ति के मन में एक मंथन की प्रक्रिया भीतर ही भीतर चलने लगती है।
व्यक्ति कथाकार के कथन में स्वयं पर दृष्टि डालता है। आत्म निरीक्षण करता है, स्वयं की समीक्षा के बाद स्वशोधन में समय अवश्य लगता है, लेकिन सन्मार्ग का संकल्पी स्वशोधन के प्रति जागरूकता के साथ आचरण करता है।