जिले में उत्साहपूर्वक देवोत्थान एकादशी (ढिठवान
एकादशी) मनाई गई। इसे देव दीपावली भी कहते हैं यानी स्वर्ग लोक में देवतागण
दीपावली का पर्व मनाते हैं। देवोत्थान एकादशी में भगवान विष्णु अपनी योग
निद्रा से जागते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी शक्तियों को पहचान कर
दूसरों की भलाई में लगाना चाहिए।
रविवार को देवोत्थान एकादशी मनाई गई।
भक्तों ने भृगुधाम भिटौरा स्थित ओम घाट पहुंचकर गंगा स्नान किया।
श्रद्धालु गंगा स्नान करने के बाद ब्राह्मणों को दान दक्षिणा दिया।
गंगा
घाटों में भोर पहर से ही हर हर महादेव और गंगा मइया के जयकारे की गूंज होती
रही। भक्तों ने गन्ने, सिंघाड़ा, चना का साग आदि से भोग लगाया और सालिगराम
की मूर्ति की विधि विधान से पूजन किया।
श्रद्धालुओं ने ओम नमो भगवते
वासुदेवाय मंत्र का जाप कर भगवान को प्रसन्न किया। भक्तों ने एक दिन से
पहले से चावल नहीं खाया और एकादशी व्रत रखा।
आचार्य पंडित कृष्ण दत्त
अवस्थी ने बताया कि चार महीने के बाद भगवान विष्णु जागरण करते हैं। आचार्य
पंडित केके पांडेय ने बताया कि घरों में महिलाएं सोमवार को ब्रह्म मुहुर्त
पर गन्ने से सूप बजाएंगी। भगवान विष्णु लक्ष्मी जी के साथ आगमन करेंगे।